Google Maps ने 21 वर्षों में एक संकटग्रस्त स्टार्टअप से वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े नेविगेशन प्लेटफॉर्म के रूप में विकास किया है। इंटरएक्टिव मैप तकनीक, निरंतर तकनीकी उन्नयन और सुदृढ़ राजस्व मॉडल के माध्यम से यह आज Alphabet के लिए हजारों करोड़ रुपये की आय का एक प्रमुख स्रोत बन चुका है।
Google Maps की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के Where2 नामक स्टार्टअप से हुई थी, जिसकी स्थापना Lars और Jens Rasmussen ने की थी। फंडिंग संकट के दौर में Google ने इस स्टार्टअप का अधिग्रहण किया और वर्ष 2005 में इसे ब्राउज़र आधारित मैप सेवा के रूप में लॉन्च किया। उस समय MapQuest जैसे स्थिर मानचित्र प्रचलित थे, जबकि Where2 ने इंटरएक्टिव और ड्रैग करने योग्य मैप्स की अवधारणा प्रस्तुत की थी। प्रारंभिक उत्पाद Expedition एक डेस्कटॉप एप्लिकेशन था, जिसे उपयोगकर्ताओं को डाउनलोड करना पड़ता था।
Google द्वारा अधिग्रहण के बाद इस तकनीक को ब्राउज़र आधारित प्लेटफॉर्म में परिवर्तित किया गया। 2005 में लॉन्च से पहले Google Maps का लीक होना एक उल्लेखनीय घटना रहा, जिसमें उपयोगकर्ताओं ने पहली बार स्मूथ और ड्रैग करने योग्य डिजिटल मैप्स देखे। इसके बाद सैटेलाइट इमेजरी, लोकेशन लेयर्स और डेवलपर API जैसे फीचर्स जोड़े गए।

बाद के वर्षों में मोबाइल एप्लिकेशन, रियल टाइम ट्रैफिक अपडेट, GPS नेविगेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रूट ऑप्टिमाइजेशन को शामिल किया गया। वर्ष 2006 तक Google Maps दुनिया का सबसे बड़ा मैप प्रोवाइडर बन चुका था और वर्तमान में भी तकनीक और डेटा स्केल के आधार पर इसका विस्तार जारी है।
Google Maps अब केवल नेविगेशन सेवा नहीं रह गया है, बल्कि एक स्थापित राजस्व प्लेटफॉर्म बन चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2019 में इसका राजस्व लगभग 3 अरब डॉलर था, जो वर्ष 2023 तक बढ़कर 11 अरब डॉलर, यानी लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
इसकी आय का मुख्य स्रोत विज्ञापन हैं। मैप्स पर प्रदर्शित विज्ञापन, प्रमोटेड पिन्स और स्पॉन्सर्ड रिजल्ट्स के लिए कंपनियां भुगतान करती हैं। इसके अतिरिक्त, Google Maps API और लोकेशन सेवाओं के उपयोग के लिए डेवलपर्स और व्यवसायों से शुल्क लिया जाता है, जिससे प्लेटफॉर्म का राजस्व मॉडल निरंतर सक्रिय बना हुआ है।








