सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन अगर इसके नियमों का पालन न किया जाए तो पुण्य की जगह पाप का भागी बनना पड़ सकता है। जानें वो जरूरी बातें।
सावन में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करने से धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ये पूजा हर प्रकार की बाधा को दूर करती है।
शिवपुराण के अनुसार, कलयुग की शुरुआत में ऋषि मंडप ने सबसे पहले पार्थिव शिवलिंग की पूजा की थी। श्रीराम ने भी लंका युद्ध से पहले ये पूजा की थी।
पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए सिर्फ पवित्र नदी, तालाब या स्वच्छ गमले की मिट्टी का प्रयोग करें। दूषित या अन्य मिट्टी का उपयोग वर्जित है।
मिट्टी को अच्छे से धोकर उसमें गोबर, गुड़, घी और भस्म मिलाएं। शिवलिंग की ऊंचाई 12 अंगुल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
प्रदोष काल में उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पूजा करें। जल, पंचामृत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें। शिव चालीसा और आरती करें।
पार्थिव शिवलिंग पर चढ़ाया भोग न खाएं, इसे गौ माता को अर्पित करें। पूजा के बाद शिवलिंग का विसर्जन जल में श्रद्धा से करें।