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अंतरिक्ष में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला रचेंगे इतिहास, मई 2025 में भरेंगे ISS के लिए उड़ान

अंतरिक्ष में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला रचेंगे इतिहास, मई 2025 में भरेंगे ISS के लिए उड़ान
अंतिम अपडेट: 10 घंटा पहले

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रचने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर जाने वाले पहले भारतीय वायुसेना अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री बनने जा रहे हैं। उनकी यह ऐतिहासिक यात्रा मई 2025 में अक्सियम मिशन 4 (Ax-4) के तहत होगी।

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला जल्द ही अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर रुख करेंगे। उन्हें मई 2025 में अक्सियम मिशन 4 (Ax-4) के तहत अंतरिक्ष भेजा जाएगा। इस यात्रा के साथ शुभांशु शुक्ला, राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय और ISS तक पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन जाएंगे।

गगनयान से पहले बड़ा मौका

शुक्ला को भारत के महत्वाकांक्षी मानवयुक्त मिशन गगनयान के लिए भी चुना गया है। ऐसे में Ax-4 मिशन उनके लिए अंतरिक्ष में उड़ान का अहम अनुभव प्रदान करेगा। इस मिशन के माध्यम से वे अंतरिक्ष में जीवन, अनुसंधान और संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ हासिल करेंगे, जो गगनयान के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी।

मिशन का दल और वैश्विक साझेदारी

अक्सियम मिशन 4 में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे। इस मिशन का नेतृत्व NASA की पूर्व अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन करेंगी। उनके साथ हंगरी के तिबोर कपू और पोलैंड के स्लावोश उज़नांस्की-विस्नियव्सकी भी शामिल हैं। यह पहली बार होगा जब हंगरी और पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री भी ISS तक पहुंचेंगे।Ax-4 मिशन को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा और यह स्पेसX के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए ISS तक जाएगा। मिशन के दौरान सभी अंतरिक्ष यात्री लगभग 14 दिन तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर वैज्ञानिक प्रयोग, शैक्षणिक गतिविधियां और व्यावसायिक अनुसंधान में भाग लेंगे।

प्रसांत नायर को मिली बैक-अप की जिम्मेदारी

अगर किसी कारणवश शुभांशु शुक्ला मिशन में भाग नहीं ले पाते हैं, तो उनकी जगह लेने के लिए ग्रुप कैप्टन प्रसांत बालकृष्णन नायर को बैकअप अंतरिक्ष यात्री के रूप में नामित किया गया है। यह बैकअप सिस्टम किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए एक आवश्यक रणनीति है, जो अंतरिक्ष अभियानों का अहम हिस्सा होती है।

Ax-4 मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का भी प्रतीक है। NASA और ISRO के बीच तकनीकी आदान-प्रदान और संयुक्त परियोजनाएं भविष्य के लिए रास्ते खोल रही हैं।

क्यों है ये मिशन खास?

* शुभांशु शुक्ला होंगे पहले भारतीय जो ISS तक पहुंचेंगे
* Ax-4 मिशन से पहले तीन सफल निजी मिशन हो चुके हैं (Ax-1, Ax-2, Ax-3)
* गगनयान से पहले भारत के लिए वैश्विक मंच पर एक अहम प्रशिक्षण मौका
* भारत, अमेरिका, पोलैंड और हंगरी की साझेदारी का अनूठा उदाहरण

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