चैत्र नवरात्र 2025 में मां दुर्गा की उपासना का पावन पर्व 30 मार्च से आरंभ होकर 6 अप्रैल तक चलेगा। नवरात्रि के अंतिम दिनों में हवन और कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि नौ दिनों तक उपवास करने वाले भक्त यदि हवन नहीं करते, तो उनका व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं इस साल हवन से जुड़ी तारीखें, मुहूर्त, विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व।
हवन कब करें – अष्टमी या नवमी
चैत्र नवरात्रि में हवन अष्टमी (5 अप्रैल) या नवमी (6 अप्रैल) किसी भी दिन किया जा सकता है। यदि आप अष्टमी को व्रत का पारण करना चाहते हैं, तो हवन उसी दिन करें। वहीं, जो भक्त नवमी को व्रत समाप्त करते हैं, वे नवमी को हवन कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हवन और कन्या पूजन के बिना नवरात्र का व्रत पूर्ण नहीं होता।
हवन का शुभ मुहूर्त
अष्टमी हवन मुहूर्त: 5 अप्रैल – सुबह 11:59 से दोपहर 12:49 तक
नवमी हवन मुहूर्त: 6 अप्रैल – सुबह 11:58 से दोपहर 12:49 तक
विशेष बात यह है कि नवमी के दिन रवि योग, रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इन शुभ योगों में हवन करने से पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है।
हवन की विधि व नियम
हवन कुंड को साफ स्थान पर पूर्व दिशा की ओर रखें।
हवन सामग्री में घी, तिल, जौ, गुग्गुल, लोबान आदि का प्रयोग करें।
हवन के समय मां दुर्गा के मंत्रों का उच्चारण करें।
हवन के बाद देवी की आरती करें और कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा दें।
घर के सभी सदस्य हवन में भाग लें तो अधिक फलदायी माना जाता है।
हवन के दौरान बोले जाने वाले मंत्र
ऊं स्वस्ति न इन्द्रश्चाग्निश्च स्वस्ति नः पथ्यावतीः।।
स्वस्ति नो वृषपर्वा विश्वेदेवा स्वस्तये।।
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।।
ऊं दुं दुर्गायै नमः।।
हवन का धार्मिक महत्व
* हवन से घर का वातावरण शुद्ध होता है।
* इसमें उपयोग की जाने वाली सामग्री से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
* हवन से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
* यह आत्मिक और मानसिक शुद्धि का भी माध्यम है।
चैत्र नवरात्र 2025 में यदि आप मां दुर्गा का संपूर्ण आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो अष्टमी या नवमी के दिन समयानुसार हवन अवश्य करें। साथ ही कन्या पूजन करके व्रत का पारण करें। ये पावन कर्म न केवल आध्यात्मिक बल प्रदान करते हैं, बल्कि घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा भी लाते हैं।