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मणिपुर में शांति स्थापना को लेकर पहल तेज, मैतेई-कुकी के बीच बातचीत शुरू

मणिपुर में शांति स्थापना को लेकर पहल तेज, मैतेई-कुकी के बीच बातचीत शुरू
अंतिम अपडेट: 11 घंटा पहले

मणिपुर में चार महीने से हिंसा थमी है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। केंद्र सरकार ने मैतेई और कुकी समुदाय के साथ शांति बहाली को लेकर अहम बैठक की।

Manipur Violence: मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय संघर्ष को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को मैतेई और कुकी समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ केंद्र सरकार ने साझा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली, आपसी सहयोग को बढ़ावा देना और राज्य में शांति की स्थायी स्थापना के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना था।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी

इस अहम बैठक में ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (AMUCO) और फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन (FOCS) जैसे प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मैतेई समुदाय की ओर से छह सदस्यीय दल ने हिस्सा लिया, वहीं कुकी समुदाय की ओर से नौ प्रतिनिधि मौजूद रहे। केंद्र सरकार की ओर से खुफिया ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक ए.के. मिश्रा भी उपस्थित थे।

गृह मंत्री की घोषणा के बाद हुई पहली संयुक्त बैठक

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही संसद में मणिपुर पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार जल्द ही दोनों समुदायों के साथ एक संयुक्त बैठक करेगी। इसी के बाद गृह मंत्रालय की ओर से यह पहल की गई है। शाह ने यह भी स्पष्ट किया था कि सरकार की प्राथमिकता हिंसा समाप्त करना नहीं, बल्कि स्थायी शांति बहाल करना है।

स्थिति नियंत्रण में, लेकिन संतोषजनक नहीं

हालांकि बीते चार महीनों में मणिपुर में कोई नई मौत नहीं हुई है, फिर भी सरकार और प्रशासन स्थिति को पूरी तरह संतोषजनक नहीं मानते। हजारों विस्थापित अब भी राहत शिविरों में हैं, जिनकी वापसी और पुनर्वास की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति शासन के बाद नए राज्यपाल की सक्रिय भूमिका

13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जब मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद केंद्र ने पूर्व गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को राज्यपाल नियुक्त किया। वे लगातार लोगों से संवाद कर रहे हैं और हथियार सरेंडर की अपील कर चुके हैं। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में हथियार प्रशासन को सौंपे गए हैं।

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