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राष्ट्रपति भवन में रमजान: परंपरा, एकता और आस्था का प्रतीक, जानें कौन-कौन पहुंचे?

राष्ट्रपति भवन में रमजान: परंपरा, एकता और आस्था का प्रतीक, जानें कौन-कौन पहुंचे?
अंतिम अपडेट: 2 दिन पहले

राष्ट्रपति भवन मस्जिद भारतीय गणराज्य के प्रमुख स्थल राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित है। यह मस्जिद न सिर्फ एक धार्मिक स्थान है, बल्कि भारतीय संस्कृति और धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक भी हैं।

नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में रमजान का पर्व हमेशा से ही एकता और सांस्कृतिक सौहार्द्र का प्रतीक रहा है। यहां वर्षों से रमजान के पाक महीने में 'ख़त्म शरीफ़' का आयोजन किया जाता रहा है। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक, हर राष्ट्रपति ने इस परंपरा को सजीव बनाए रखा हैं।

राष्ट्रपति भवन मस्जिद: धार्मिक सौहार्द्र का प्रतीक

राष्ट्रपति भवन में बनी मस्जिद में रमजान के दौरान नमाज़ अदा करना एक पुरानी परंपरा है। 1950 के दशक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस परंपरा की नींव रखी थी, जिसे आज भी राष्ट्रपति भवन के सभी लोग बड़ी श्रद्धा और उत्साह से निभाते हैं। हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी 'ख़त्म शरीफ़' के अवसर पर राष्ट्रपति भवन मस्जिद में हिस्सा लिया और पवित्र क़ुरान-ए-पाक के मुकम्मल होने पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया।

राष्ट्रपतियों की आस्था: जाकिर हुसैन से लेकर एपीजे अब्दुल कलाम तक

राष्ट्रपति भवन में रमजान के दौरान नमाज अदा करने की परंपरा को डॉ. जाकिर हुसैन, फखरुद्दीन अली अहमद और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रपति भी निभा चुके हैं। डॉ. जाकिर हुसैन अक्सर अपने परिवार के साथ मस्जिद में आकर नमाज़ अदा करते थे। वहीं, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जुमा की नमाज के बाद युवाओं के साथ बातचीत करते थे, जिससे एक प्रेरणादायक माहौल बनता था।

मंदिर-मस्जिद की स्थापना: राजेंद्र बाबू की पहल

डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पहल पर ही राष्ट्रपति भवन परिसर में मंदिर और मस्जिद का निर्माण हुआ था। चूंकि राष्ट्रपति भवन से सटे चर्च और गुरुद्वारा पहले से मौजूद थे, इसलिए इनके निर्माण की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। राजेंद्र प्रसाद और उनकी पत्नी राजवंशी देवी राष्ट्रपति भवन के कर्मचारियों के साथ मिलकर होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस और गुरुपर्व जैसे त्योहार भी मनाते थे।

सभी त्योहारों का समावेश

राष्ट्रपति भवन में सिर्फ रमजान ही नहीं, बल्कि सभी प्रमुख त्योहारों को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दशकों तक राष्ट्रपति भवन में रहे पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी अनादि बरूआ के अनुसार, यहाँ खत्म शरीफ के अवसर पर राष्ट्रपति की ओर से सभी कर्मचारियों को मिठाई बांटी जाती है। राष्ट्रपति भवन में धर्मनिरपेक्षता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है। चाहे होली हो या ईद, क्रिसमस हो या दिवाली, हर पर्व को पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। राष्ट्रपति भवन की मस्जिद के पास स्थित मंदिर में भी सभी हिंदू त्योहार मनाए जाते हैं।

राष्ट्रपति भवन की मस्जिद: एक विशेष स्थान

यहां सिर्फ इबादत ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी अवसर मिलता है। यहां के इमाम को राष्ट्रपति भवन में ही परिवार सहित रहने की सुविधा प्रदान की जाती है। कोविड के दौर को छोड़ दें तो यहां हर पर्व का उल्लास देखते ही बनता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रमजान के मौके पर राष्ट्रपति भवन मस्जिद में हाजिरी लगाई और पगड़ी व उपहार भेंट कर परंपरा का निर्वहन किया। उनके इस कदम से राष्ट्रपति भवन में धार्मिक एकता और सामूहिकता का संदेश और भी मजबूत हुआ।

राष्ट्रपति भवन में रमजान मनाने की यह परंपरा भारत की विविधता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है। हर साल इस मौके पर राष्ट्रपति भवन का वातावरण एकता और भाईचारे से सराबोर हो जाता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्धि को भी दर्शाती हैं।

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