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शाही ईदगाह विवाद: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा पूजा स्थल अधिनियम की सीमा, 8 अप्रैल को होगी सुनवाई

शाही ईदगाह विवाद: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा पूजा स्थल अधिनियम की सीमा, 8 अप्रैल को होगी सुनवाई
अंतिम अपडेट: 19 घंटा पहले

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के शाही ईदगाह-श्रीकृष्ण जन्मस्थान विवाद से जुड़े एक अहम पहलू पर शुक्रवार को सहमति जताई कि वह पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की प्रयोज्यता को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों की विपरीत दलीलों की जांच करेगा। 

नई दिल्ली: मथुरा के शाही ईदगाह-श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में अब सबसे अहम सवाल यह बन गया है कि क्या इस पर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 लागू होता है? इस सवाल का जवाब अब सुप्रीम कोर्ट देगा, जिसने इस अधिनियम की प्रयोज्यता और सीमा को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने पर सहमति जता दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी प्रथम दृष्टया सही माना है, जिसमें हिंदू पक्ष की अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ सुनने का आदेश दिया गया था।

क्या है मामला?

मथुरा की ऐतिहासिक शाही ईदगाह मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि ईदगाह मस्जिद एक मंदिर की भूमि पर बनी है और वे उस स्थान को वापस पाना चाहते हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि 1991 का पूजा स्थल अधिनियम इस तरह के दावों पर कानूनी रोक लगाता है क्योंकि यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 के बाद किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप में बदलाव को प्रतिबंधित करता है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अनुपस्थिति में इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ, जिसमें जस्टिस संजीव खन्ना, संजय कुमार और के वी विश्वनाथन शामिल हैं, ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का मुकदमों को समेकित करने का फैसला संतुलित और तार्किक है। मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वकील तस्नीम अहमदी ने दलील दी कि यह मुकदमा पूजा स्थल अधिनियम की भावना का उल्लंघन करता है। 

वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने तर्क दिया कि ईदगाह एक संरक्षित स्मारक है और ASI अधिनियम के तहत आती है, इसलिए यह 1991 के अधिनियम के दायरे में नहीं आती।

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?

12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी निचली अदालतों को निर्देश दिया था कि वे मंदिर-मस्जिद विवादों पर किसी तरह का अंतरिम या अंतिम आदेश पारित न करें। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि कोई भी नया मुकदमा, जो इस्लामी शासनकाल के दौरान मंदिरों के मस्जिदों में रूपांतरण को चुनौती देता हो, स्वीकार न किया जाए। इसमें वाराणसी का ज्ञानवापी मामला और मथुरा का शाही ईदगाह विवाद दोनों शामिल हैं।

हाईकोर्ट का रुख

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने 1 अगस्त 2023 के आदेश में कहा था कि वक्फ अधिनियम, पूजा स्थल अधिनियम, विशिष्ट राहत अधिनियम और अन्य सिविल कानूनों की कोई भी धारा इन मुकदमों को रोकने में सक्षम नहीं है। हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की वह याचिका भी खारिज कर दी थी जिसमें मुकदमों को अलग-अलग सुनने की मांग की गई थी।

इस पूरे मामले की केंद्रीय कड़ी पूजा स्थल अधिनियम की वैधता है। एक ओर कुछ याचिकाओं में इस अधिनियम को संविधान के खिलाफ बताते हुए इसकी रद्दीकरण की मांग की गई है, वहीं दूसरी ओर कुछ याचिकाएं चाहती हैं कि इसे पूरी तरह अक्षरश: लागू किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध कर दिया है और अब 8 अप्रैल को मामले की अगली अहम सुनवाई होगी। 

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