वक्फ संशोधन बिल पर केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। बिहार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने बिल का समर्थन करने का ऐलान किया है। ये दोनों दल पहले संशोधन की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार द्वारा उनकी शर्तें मान लिए जाने के बाद अब वे बिल के पक्ष में खड़े हो गए हैं।
नई दिल्ली: आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश कर दिया गया है। इस बिल को लेकर करीब 8 घंटे तक चर्चा होगी, जिसके बाद इसे पास करने के लिए वोटिंग कराई जाएगी। सरकार को इस बिल पर अपने सहयोगी पार्टियों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। हालांकि, एनडीए के दो प्रमुख दल—जेडीयू और टीडीपी ने इस बिल पर कुछ संशोधन की मांग की थी।
इन दोनों दलों की मुस्लिम वोटर्स में अच्छी-खासी पकड़ है, इसलिए वे वक्फ संशोधन बिल पर पहले संशोधन की मांग कर रहे थे। लेकिन अब यह दोनों दल सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार हो गए हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि सरकार ने उनकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ आवश्यक बदलावों का आश्वासन दिया है। इससे जेडीयू और टीडीपी के मुस्लिम वोटर्स के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा और सरकार को बिल पास कराने में आसानी होगी।
जेडीयू का समर्थन: शर्तें और सहमति
लोकसभा में जेडीयू के कुल 12 सांसद हैं, और अब यह पार्टी वक्फ संशोधन बिल के समर्थन में है। जेडीयू की प्रमुख मांग यह थी कि वक्फ की जमीन पर राज्य सरकार का अधिकार बना रहे। इसके साथ ही, नया कानून पुरानी तारीख से लागू न हो और मुस्लिम धार्मिक स्थलों से छेड़छाड़ न हो। इसके अलावा, निपटारे के लिए कलेक्टर से ऊपर के अधिकारी की नियुक्ति की मांग भी सरकार ने मान ली है।
टीडीपी का रुख: नायडू का समर्थन और मांगे पूरी
टीडीपी, जिसके लोकसभा में 16 सांसद हैं, ने भी बिल का समर्थन करने का फैसला किया है। टीडीपी की मांग थी कि पहले से रजिस्टर हो चुकी संपत्तियां वक्फ संपत्ति ही मानी जाएं। साथ ही, जांच के लिए कलेक्टर अंतिम प्राधिकारी न हो। दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग भी सरकार ने मान ली है।
केंद्र सरकार को मिला बहुमत का समर्थन
सरकार के पक्ष में कुल 293 सांसद हैं, जो बहुमत (272) से 21 अधिक हैं। इसमें भाजपा (240), लोजपा (5), टीडीपी (16), जेडीएस (2), जेडीयू (12), जनसेना (2), शिवसेना (शिंदे गुट) (7), रालोद (2), और अन्य 7 सांसद शामिल हैं। विपक्ष के पास 239 सांसद हैं, जो बहुमत से 33 कम हैं। इसमें कांग्रेस (99), एनसीपी (8), सपा (37), राजद (4), तृणमूल कांग्रेस (28), आप (3), डीएमके (22), झामुमो (3), शिवसेना (उद्धव गुट) (9), आईएमयूएल (3), लेफ्ट (8), नेकां (2), और अन्य (12) सांसद शामिल हैं।
वक्फ संशोधन बिल पर 8 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग होगी। सहयोगी दलों का समर्थन मिलने से बिल के पास होने के आसार प्रबल हो गए हैं। जेडीयू और टीडीपी के समर्थन से विपक्ष के विरोध का असर कम हो गया है। अब देखना यह होगा कि संसद में बहस के दौरान विपक्ष की रणनीति क्या होती है।