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Waqf Bill: राज्यसभा में वक्फ बिल पर गरजे सुधांशु त्रिवेदी, विपक्ष पर साधा निशाना

Waqf Bill: राज्यसभा में वक्फ बिल पर गरजे सुधांशु त्रिवेदी, विपक्ष पर साधा निशाना
अंतिम अपडेट: 15 घंटा पहले

राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, सरकार गरीब मुस्लिमों के हित में यह विधेयक लाई है।

Waqf Bill: राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे गरीब मुस्लिमों के हित में बताया। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह विधेयक पूरी गंभीरता और विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। हालांकि, कुछ लोग इसके प्रावधानों को लेकर गलतफहमी फैला रहे हैं।

विपक्ष पर निशाना – 'वक्फ ने किया हसीन सितम...'

त्रिवेदी ने वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने वाले दलों पर तंज कसते हुए कहा, 'वक्फ ने किया हसीन सितम, मुस्लिम लीग और शिवसेना हो गए हम'। उन्होंने ताजमहल पर वक्फ बोर्ड के दावे पर सवाल उठाया और कहा कि देश में सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड अलग-अलग क्यों हैं?

'यह लड़ाई शराफत अली और शरारत खान की'

त्रिवेदी ने कहा कि यह विधेयक समाज के ईमानदार लोगों के समर्थन में है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, 'यह लड़ाई शराफत अली और शरारत खान के बीच है, और हमारी सरकार शराफत अली के साथ खड़ी है'। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार कथित उग्रवादी ठेकेदारों के बजाय गरीब मुसलमानों के साथ है।

कांग्रेस पर हमला – 'अल्पसंख्यकों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया'

भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हमेशा वोट बैंक की राजनीति करती आई है। उन्होंने सवाल किया कि वक्फ बोर्ड की भूमि पर दावे पिछली सरकारों में कैसे वैध हो गए, जबकि ब्रिटिश शासनकाल में मुगलकालीन संपत्तियां पहले ही जब्त हो चुकी थीं? उन्होंने यह भी पूछा कि हिंदू और सिखों की जमीनों की वसूली उसी तरह क्यों नहीं हुई, जैसी मुस्लिम वक्फ संपत्तियों की हुई?

'मुस्लिम समाज की पहचान बदल रही है'

त्रिवेदी ने मुस्लिम समाज की पहचान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब भारत को आजादी मिली थी, तब यह समाज बिस्मिल्लाह खान, उस्ताद जाकिर हुसैन, कैफी आज़मी और साहिर लुधियानवी जैसे कलाकारों से पहचाना जाता था। लेकिन आज यह समाज किन नामों से जोड़ा जाता है? उन्होंने इशरत जहां, याकूब मेनन, अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम का उदाहरण देते हुए इसे 1976 से शुरू हुई धर्मनिरपेक्ष राजनीति का नतीजा बताया।

विपक्ष का कड़ा विरोध

सांसद सुधांशु त्रिवेदी के बयान पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई। कांग्रेस के जयराम रमेश, दिग्विजय सिंह और NCP-SP की फौजिया खान समेत कई सांसदों ने कहा कि पूरे समुदाय को अपराधियों से जोड़ना गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी निंदनीय है और इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। हालांकि, सभापति ने त्रिवेदी के बयान का बचाव किया, जिससे कांग्रेस सांसदों ने और विरोध जताया।

'उम्मीद' बनाम 'उम्माह' – भाजपा की रणनीति

भाजपा ने वक्फ विधेयक को 'उम्मीद' नाम दिया है। इस पर त्रिवेदी ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'हम उम्मीद देख रहे हैं, लेकिन कुछ लोग उम्माह का सपना देख रहे हैं। उम्माह यानी इस्लामिक राष्ट्र। उम्मीद वालों को रोशनी नजर आ रही है, उम्माह वालों को अंधेरा'। उन्होंने कहा कि सभी दलों को मिलकर इस विधेयक को पारित करना चाहिए।

अठावले का समर्थन – 'मोदी फिर बनेंगे प्रधानमंत्री'

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इस विधेयक को परिवर्तनकारी बताते हुए समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि इससे हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई समुदायों के बीच एकता बढ़ेगी। उन्होंने दावा किया कि पहले मुस्लिम वोट कांग्रेस को जाते थे, लेकिन अब भाजपा को मिल रहे हैं। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि 'नरेंद्र मोदी चौथी बार भी प्रधानमंत्री बनेंगे'।

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