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Kabul Blast: काबुल में बम विस्फोट से दहशत, कौन है दुश्मन? जिसने तालिबान के गृहमंत्री के रिश्तेदार को बनाया निशाना

Kabul Blast: काबुल में बम विस्फोट से दहशत, कौन है दुश्मन? जिसने तालिबान के गृहमंत्री के रिश्तेदार को बनाया निशाना
अंतिम अपडेट: 12-12-2024

काबुल में तालिबान के वरिष्ठ नेता और मंत्री की आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई। यह हमला तब हुआ जब वह मंत्रालय से बाहर निकल रहे थे। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Afghanistan: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बुधवार को हुए आत्मघाती हमले में तालिबान सरकार के रिफ्यूजी मंत्री खलील उर-रहमान हक्कानी और दो अन्य लोगों की मौत हो गई। हमला मंत्रालय के अंदर हुआ, जो तालिबान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

तालिबान के लिए बड़ा नुकसान

यह पहली बार है जब तालिबान सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री को निशाना बनाया गया है। खलील हक्कानी, गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के चाचा थे और तालिबान शासन की रीढ़ माने जाते थे। इस हमले ने तालिबान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिम्मेदारी किसकी?

फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस घटना को "बहुत बड़ी क्षति" करार देते हुए कहा कि खलील हक्कानी ने अपना जीवन इस्लाम की सेवा में समर्पित किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तालिबान के लिए अब तक का सबसे बड़ा आघात है।

क्या है पाकिस्तान कनेक्शन?

पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और अन्य नेताओं ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इसे आतंकवादी हमला करार दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, खलील हक्कानी पाकिस्तान से नाराज थे, जो इस घटना के पीछे नए संकेत दे रहा है।

तालिबान के दुश्मन कौन?

इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़े आतंकी संगठन को तालिबान का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। हाल के महीनों में आईएस ने अफगानिस्तान में कई बड़े हमले किए हैं, जिनमें शिया मुस्लिम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया है।

महिलाओं पर बयानबाजी की वजह से हत्या?

क्राइसिस ग्रुप के विश्लेषक इब्राहीम बहिस का कहना है कि खलील हक्कानी ने महिलाओं और लड़कियों के मुद्दे पर हाल ही में बयान दिया था, जिसकी गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी ने आलोचना की थी। इसे लेकर सत्ता संघर्ष की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गृहयुद्ध के संकेत नहीं, बल्कि तालिबान में आंतरिक शक्ति संतुलन का मामला हो सकता है।

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