होली के रंग अभी उतरे भी नहीं होते कि रंग पंचमी फिर से उल्लास की लहर दौड़ा देती है। खासतौर पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व जबरदस्त जोश के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार तिथि को लेकर असमंजस बना हुआ है—क्या यह 19 मार्च को होगी या 20 मार्च को? आइए, जानते हैं इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े खास रहस्य।
रंग पंचमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, रंग पंचमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को आती है। इस बार पंचमी तिथि की शुरुआत 18 मार्च की रात 10:09 बजे हो रही है और यह 20 मार्च की रात 12:36 बजे समाप्त होगी। ऐसे में रंग पंचमी का पर्व 19 मार्च 2025, मंगलवार को धूमधाम से मनाया जाएगा।
क्या है रंग पंचमी का आध्यात्मिक रहस्य?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने वृंदावन में रंगों की होली खेली थी। यह दिन देवताओं की होली के रूप में भी प्रसिद्ध है, जब देवी-देवताओं ने रंगों के माध्यम से अपनी कृपा पृथ्वी पर बरसाई थी। यह पर्व सकारात्मक ऊर्जा, बुराई पर अच्छाई की विजय और प्रेम के रंगों में रंग जाने का प्रतीक है।
रंग पंचमी की पूजा विधि
रंग पंचमी के दिन अगर विशेष पूजा की जाए, तो जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है। आइए जानते हैं, आसान पूजा विधि -
भगवान का पूजन: घर या मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की मूर्ति को पीले या लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
गुलाल और चंदन अर्पण: चंदन, फूल, अक्षत और गुलाल चढ़ाएं।
दीप प्रज्वलन और मंत्र जाप: घी का दीप जलाकर "ॐ श्री कृष्णाय नमः" मंत्र का जाप करें।
भोग अर्पण: पंचामृत, खीर, फल और अन्य प्रसाद अर्पित करें और सभी में बांटें।
रंग पंचमी के अद्भुत उपाय
रिश्तों में प्रेम बढ़ाने के लिए: भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को गुलाल और लाल चंदन अर्पित करें। यह उपाय दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बनाए रखने के लिए शुभ माना जाता है।
धन प्राप्ति के लिए: हल्दी की गांठ और सिक्का पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी या पर्स में रखें। इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
घर में शांति और समृद्धि के लिए: इस दिन गुलाल छिड़ककर "हरे राम हरे कृष्ण" कीर्तन करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में शांति बनी रहती है।
रंग खेलें, लेकिन संयम से
रंग पंचमी के दौरान प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें और पानी की बर्बादी से बचें। यह पर्व भाईचारे और प्रेम का प्रतीक है, इसे उसी भावना के साथ मनाएं ताकि खुशियों के ये रंग जीवनभर बने रहें!
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे अंतिम सत्य न मानें और अपने विवेक से निर्णय लें।