हिरा कैसे बनता है ? कैसे होती है असली हिरे की पहचान? जाने सभी बातें विस्तार से

हिरा कैसे बनता है ?  कैसे होती है असली हिरे की पहचान? जाने सभी बातें विस्तार से
Last Updated: Sat, 12 Mar 2022

हीरा कार्बन का एक रूपांतरित अपररूप है। यह कार्बन का सबसे शुद्ध रूप है और भारत में गोलकुंडा, अनंतपुर, बेलारी, पन्ना आदि स्थानों में पाया जाता है। हीरे का स्रोत किंबरलाइट नामक पत्थर है। दुनिया के कुछ प्रसिद्ध हीरों में कुलिनन, होप, कोहिनूर और पिट शामिल हैं। हीरे सदियों से राजसी वैभव और विलासिता के प्रतीक रहे हैं। भारत हजारों सालों से इनके व्यापार का केंद्र रहा है। रोमन लोग इन्हें 'भगवान के आँसू' कहते थे। 1700 के दशक के बाद भारत विश्व का प्रमुख हीरा उत्पादक देश नहीं रहा, फिर भी यहाँ हीरे का खनन जारी है। 2013 में, भारत की बड़ी औद्योगिक खदानों और कई छोटी खदानों से केवल 37,515 कैरेट हीरे निकाले गए थे, जो उस वर्ष के विश्व उत्पादन के एक प्रतिशत के दसवें हिस्से से भी कम था।

 

बहुत से लोग कहते हैं कि विश्व के पहले हीरे की खोज आज से 4000 साल पहले भारत के गोलकोंडा क्षेत्र (आधुनिक हैदराबाद) में नदी के किनारे की चमकदार रेत में हुई थी। पश्चिमी भारत के औद्योगिक शहर सूरत में दुनिया के 92% हीरों को काटने और पॉलिश करने का काम किया जाता है, जिससे करीब 500,000 लोगों को रोजगार मिलता है।

 

हीरा क्या है?

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हीरा एक पारदर्शी रत्न है, जो रासायनिक रूप से कार्बन का शुद्धतम रूप है। इसमें कोई मिलावट नहीं होती। यदि हीरे को ओवन में 763 डिग्री सेल्सियस पर गरम किया जाए, तो यह जलकर कार्बन डाइऑक्साइड बना लेता है और राख बिल्कुल भी नहीं बचती। इस प्रकार, हीरा 100% कार्बन से बना होता है।

हीरा रासायनिक तौर पर निष्क्रिय होता है और सभी घोलकों में अघुलनशील होता है। इसका आपेक्षिक घनत्व 3.51 होता है।

हीरा इतना कठोर क्यों होता है?

हीरे में सभी कार्बन परमाणु बहुत ही शक्तिशाली सह-संयोजी बन्ध द्वारा जुड़े होते हैं, इसलिए यह बहुत कठोर होता है। हीरा प्राकृतिक पदार्थों में सबसे कठोर पदार्थ है। इसमें उपस्थित चारों इलेक्ट्रॉन सह-संयोजी बन्ध में भाग लेते हैं और कोई भी इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र नहीं होता, इसलिए हीरा ऊष्मा और विद्युत का कुचालक होता है।

 

हीरे कहाँ बनते हैं?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, हीरे जमीन से करीब 160 किलोमीटर नीचे, बेहद गर्म माहौल में बनते हैं। ज्वालामुखीय गतिविधियां इन्हें ऊपर लाती हैं। ग्रहों या पिंडों की टक्कर से भी हीरे मिलते हैं। हीरे गहरी दबाव और तापमान के बीच कार्बन के अणुओं के अनोखे ढंग से जुड़ने से बनते हैं।

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