ब्रह्मांड की परिक्रमा

ब्रह्मांड की परिक्रमा
Last Updated: 12 जून 2023

शिवजी और पार्वती मां की चार संताने थी –गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती कार्तिक। सबके अपने अपने वाहन थे। बुद्धि के देवता गणेश का वाहन चूहा था; धन की देवी लक्ष्मी का वाहन सफेद उल्लू था; ज्ञान की देवी सरस्वती का वाहन हंस था; युद्ध के देवता कार्तिक का वाहन मोर था। एक दिन शिवजी और पार्वती मां बैठे थे। गणेश और कार्तिक पास ही में खेल रहे थे। शिव जी ने दोनों की परीक्षा लेनी चाही। उन्होंने घोषणा की कि उनमें से जो कोई पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लेगा, वही अधिक शक्तिशाली माना जाएगा।

कार्तिक तुरंत अपने मोर पर बैठे और ब्रह्मांड के चक्कर लगाने निकल पड़े। उन्होंने समुद्र, पर्वत, पृथ्वी, चंद्रमा, और आकाश गंगा, सब को पार किया। गणेश को हराने के लिए वे तेज गति से बढ़ते चले जा रहे थे। वे समझ रहे थे कि गणेश अपने भारी भरकम शरीर के साथ चूहे की सवारी करके उनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे।

इस बीच, गणेश अपने माता-पिता के पैरों के पास शांति से बैठे रहे। कुछ देर बाद वे उठे और उन्होंने अपने माता पिता के तीन चक्कर जल्दी से लगा लिए। जब कार्तिक लौट कर आए तो वे यह देख कर दंग रह गए की गणेश तो शिवजी की गोद में बैठ कर मुस्कुरा रहे हैं। वे हैरान थे कि गणेश उनसे पहले कैसे लौट आए। क्रोधी स्वभाव होने के कारण उन्होंने गणेश पर छल करने का आरोप लगा डाला। गणेश ने जवाब दिया कि उनके माता-पिता ही उनके लिए ब्रह्मांड है और उनके चक्कर लगाना ब्रह्मांड की परिक्रमा के ही समान है।

शिव जी गणेश के बुद्धि से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने घोषणा कर दी कि अब से कोई भी शुभ कार्य करने से पहले सब लोग श्री गणेश की पूजा किया करेंगे। तब से लेकर आज तक ऐसी परंपरा चली आ रही है।

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