संस्कृत सीखने और समझने की इच्छा रखने वालों के लिए यह यूनिवर्सिटी किसी वरदान से कम नहीं है। अगर आप भी प्राचीन भारतीय विद्या में रुचि रखते हैं और संस्कृत भाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है। आइए जानते हैं, यहां एडमिशन की प्रक्रिया, कोर्स और फीस से जुड़ी हर जानकारी।
देशभर में फैले हैं 12 कैंपस, संस्कृत विद्या का प्रमुख केंद्र
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भारत में संस्कृत भाषा और शास्त्रों के अध्ययन, शोध और प्रचार-प्रसार के लिए एक प्रतिष्ठित संस्थान है। इसकी स्थापना 1970 में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के रूप में हुई थी, जिसे 2002 में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। 16 मार्च 2020 को संसद द्वारा पारित अधिनियम के तहत इसे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।
यह विश्वविद्यालय भारत के 12 प्रमुख शहरों में अपने कैंपस के जरिए संस्कृत शिक्षा का प्रसार कर रहा है। इसके प्रमुख परिसरों में दिल्ली, जयपुर, पुरी, लखनऊ, श्रृंगेरी और तिरुपति शामिल हैं।
ऐसे मिलेगा इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन
अगर आप इस प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में दाखिला लेना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) पास करना होगा। इस परीक्षा के आधार पर ही छात्रों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है।
कौन-कौन से कोर्स कराए जाते हैं इस यूनिवर्सिटी में
यहां संस्कृत शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर कोर्स उपलब्ध हैं:
• प्राक्-शास्त्री (स्नातक पूर्व)
• शास्त्री (स्नातक स्तर)
• आचार्य (स्नातकोत्तर स्तर)
• विद्यावारिधि (पीएचडी स्तर)
• विशिष्टाचार्य (पोस्ट-डॉक्टोरल स्तर)
इसके अलावा, शिक्षक प्रशिक्षण के लिए बी.एड और एम.एड कोर्स भी उपलब्ध हैं। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत संस्कृत साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, न्याय, वेदांत, पुराण, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, योग और आयुर्वेद जैसे विषयों का अध्ययन कराया जाता है।
फीस स्ट्रक्चर: जानिए कितनी होगी पढ़ाई की लागत?
यह विश्वविद्यालय अपनी किफायती फीस संरचना के लिए जाना जाता है, जिससे अधिक से अधिक छात्र यहां पढ़ाई कर सकें।
• शास्त्री (स्नातक) पाठ्यक्रम: वार्षिक शुल्क लगभग 5,000-8,000 रुपये
• आचार्य (स्नातकोत्तर) पाठ्यक्रम: 8,000-12,000 रुपये
• शोध पाठ्यक्रम (पीएचडी एवं पोस्ट-डॉक्टोरल): 15,000-25,000 रुपये के बीच
पद्म विभूषण से सम्मानित संस्कृत विद्वान पढ़ चुके हैं यहां से
इस विश्वविद्यालय से पढ़े कई छात्र आज देश-विदेश में अपनी विद्वता के लिए पहचाने जाते हैं। इनमें प्रो. वासुदेव अभ्यंकर शास्त्री, पद्म विभूषण से सम्मानित प्रो. सत्यव्रत शास्त्री और प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान प्रो. रामकरण शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।
संस्कृत और आधुनिक शिक्षा का अनूठा संगम
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय केवल पारंपरिक संस्कृत शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि आधुनिक युग के अनुसार संस्कृत विद्या को डिजिटल और तकनीकी युग से भी जोड़ रहा है। यहां कंप्यूटर एप्लिकेशन, अनुवाद अध्ययन, और अन्य आधुनिक विषयों के साथ संस्कृत का समावेश किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बनाई अलग पहचान
पिछले कुछ वर्षों में, इस विश्वविद्यालय ने अपनी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बनाई है। यहां विदेशी छात्रों के लिए भी पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं और विभिन्न देशों के विश्वविद्यालयों के साथ अकादमिक समझौते भी किए गए हैं। छात्र और शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों के जरिए संस्कृत विद्या को वैश्विक मंच पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
संस्कृत विद्या में रुचि रखने वालों के लिए सुनहरा अवसर
अगर आप भी संस्कृत भाषा और शास्त्रों के अध्ययन में रुचि रखते हैं और इसे अपने करियर का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां पढ़कर आप न केवल इस प्राचीन भाषा के विद्वान बन सकते हैं, बल्कि इसे आधुनिक युग में नए आयाम भी दे सकते हैं।