रुड़की में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन में मौलाना सैयद अरशद मदनी ने शिक्षा, सामाजिक सुधार और भाईचारे पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से नशे और नफरत से दूर रहकर विकास और जागरूकता की राह अपनाने की अपील की।
रुड़की: जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड की प्रदेश कार्यकारिणी के अधिवेशन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने शिक्षा, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति शिक्षा, जागरूकता और आपसी सद्भाव से संभव है तथा युवाओं को नशा और सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
शिक्षा और समाज सुधार पर रहा विशेष फोकस
रुड़की स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित अधिवेशन में संगठन की भावी योजनाओं और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में शिक्षा को समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव बताते हुए युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक और धार्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया।
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मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि किसी भी समुदाय की प्रगति ज्ञान, जागरूकता और अनुशासन से जुड़ी होती है। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच अपनाने और समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
वक्फ संपत्तियों और मदरसों के संरक्षण पर प्रस्ताव
अधिवेशन के दौरान वक्फ संपत्तियों, मदरसों और मस्जिदों के संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। साथ ही समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न अभियान चलाने पर भी सहमति बनी।
बैठक में प्रदेश कार्यालय कलियर में एक कोचिंग सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिसकी शुरुआत 10 जुलाई से की जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग देना है।
भाईचारा और सद्भाव को मजबूत करने की अपील
मौलाना मदनी ने कहा कि देश की तरक्की प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान से संभव है। उन्होंने सभी समुदायों के बीच भाईचारे को मजबूत करने और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद हमेशा सामाजिक सौहार्द, मानवता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती रही है। समाज में बढ़ती चुनौतियों का सामना केवल शिक्षा, संवाद और सहयोग के माध्यम से किया जा सकता है।
नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण पर भी चर्चा
अधिवेशन में नशामुक्ति अभियान, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक पौधारोपण कार्यक्रम चलाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों और विभिन्न कानूनी विषयों पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान आलिमियत की शिक्षा पूरी करने वाले 70 मेधावी छात्रों को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। वहीं संगठन के दिवंगत पदाधिकारी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अधिवेशन का समापन प्रदेश और देश में अमन, शांति और मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआ के साथ हुआ।











