Powerus ने पाकिस्तान सेना के साथ ड्रोन तकनीक और उत्पादन पर समझौता किया

अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus ने 16 सितंबर 2026 को पाकिस्तान सेना के साथ MoU किया, जिसमें शुरुआती ड्रोन ऑर्डर शामिल है। प्रस्तावित विलय के बाद American Ventures की करीब 9.9% हिस्सेदारी होने की उम्मीद है।

अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी Powerus ने पाकिस्तान सेना के साथ ड्रोन तकनीक और उत्पादन को लेकर 16 सितंबर 2026 को एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए। समझौते में एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है, जिसकी मात्रा और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

Powerus हवाई और समुद्री ड्रोन तैयार करने वाली अमेरिकी कंपनी है, जिसका कारोबार सैन्य और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में है। पाकिस्तान सेना के साथ समझौते के तहत रक्षा खरीद, स्थानीय उत्पादन और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर चर्चा हुई है। पाकिस्तान की सेना ने Powerus के प्रतिनिधिमंडल और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बीच बैठक की पुष्टि की है, हालांकि उसके सैन्य बयान में MoU का सीधे उल्लेख नहीं किया गया था।

रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर ड्रोन तकनीक विकसित और निर्मित करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। हालांकि, उत्पादन की अंतिम साइट, क्षमता और निर्माण शुरू होने की तारीख से संबंधित सभी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हैं।

इसलिए हरीपुर, रावलपिंडी और तक्षशिला में तीन संभावित सैन्य साइटों के चयन तथा आत्मघाती ड्रोन के स्थानीय उत्पादन से जुड़े दावों को फिलहाल रिपोर्टेड जानकारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। Powerus के आधिकारिक रूप से सामने आए समझौते में इन सभी विशिष्ट साइटों और उत्पादन क्षमता की पुष्टि नहीं की गई है।

Powerus का प्रस्तावित विलय Aureus Greenway Holdings के साथ होना है। इस सौदे के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी में American Ventures की हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। American Ventures से डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप जुड़े हुए हैं।

अमेरिकी नियामकीय दस्तावेजों के अनुसार, विलय के बाद American Ventures की करीब 9.9% लाभकारी हिस्सेदारी हो सकती है। हालांकि, ट्रंप भाइयों की ओर से उन्हें निष्क्रिय निवेशक बताया गया है और कहा गया है कि वे कंपनी के संचालन या पाकिस्तान के साथ अनुबंध की बातचीत में शामिल नहीं हैं। Powerus के अधिकारियों ने भी कंपनी के कारोबारी प्रदर्शन और तकनीकी क्षमता को उसके व्यावसायिक आधार से जोड़ा है।

इसलिए इसे “ट्रंप के बेटों की कंपनी पाकिस्तान में ड्रोन बना रही है” के बजाय इस रूप में देखना अधिक सटीक है कि ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़े निवेश फंड की हिस्सेदारी वाली प्रस्तावित संयुक्त कंपनी से जुड़ी Powerus ने पाकिस्तान सेना के साथ ड्रोन समझौता किया है।

Powerus और पाकिस्तान के बीच समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में संभावित विस्तार के बीच हुआ है। Reuters के अनुसार, यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के संबंधों में सुधार की कोशिशें चल रही हैं और पाकिस्तान अपनी रक्षा एवं तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

पाकिस्तान लंबे समय से चीन और तुर्किये से सैन्य ड्रोन तथा अन्य रक्षा तकनीक हासिल करता रहा है। Powerus के साथ स्थानीय उत्पादन की संभावित व्यवस्था पाकिस्तान को कुछ तकनीकों के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित करने का अवसर दे सकती है।

हालांकि, पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों और चीन से उसके व्यापक रक्षा संबंधों को देखते हुए Powerus के साथ यह समझौता मौजूदा आपूर्ति नेटवर्क को तुरंत बदल देगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।

भारत और पाकिस्तान के बीच ड्रोन का इस्तेमाल पहले से ही सुरक्षा संबंधी चिंता का विषय रहा है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और मिसाइलों के इस्तेमाल की भारत सरकार ने पुष्टि की थी।

भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 7-8 मई 2025 की रात पाकिस्तान ने उत्तर और पश्चिम भारत में कई सैन्य ठिकानों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। सरकार के मुताबिक, इन हमलों को Integrated Counter-UAS Grid और Air Defence Systems ने बेअसर किया।

सरकारी जानकारी के अनुसार, इस दौरान रडार, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, एयर डिफेंस गन तथा जमीन और हवा से संचालित मिसाइल प्रणालियों सहित विभिन्न स्तरों वाली रक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया। भारत सरकार ने यह भी कहा कि 10 मई 2025 को पाकिस्तान की ओर से किए गए बड़े ड्रोन-मिसाइल हमले को भारतीय एयर डिफेंस, काउंटर-ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों ने विफल किया।

ड्रोन तकनीक में बदलाव के बीच काउंटर-यूएएस क्षमता भारत की सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है। भारत सरकार के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर ने स्वदेशी UAV और Counter-UAS प्रणालियों की उपयोगिता को भी सामने रखा।

जुलाई 2025 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ने स्वदेशी UAV और Counter-UAS की परिचालन प्रभावशीलता और रणनीतिक उपयोगिता प्रदर्शित की। उन्होंने इन प्रणालियों के क्षेत्र में व्यापक स्वदेशीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।

इसका अर्थ यह है कि पाकिस्तान में ड्रोन उत्पादन क्षमता बढ़ने की स्थिति में भारत के लिए निगरानी, सीमा सुरक्षा और काउंटर-ड्रोन तकनीक का महत्व बढ़ सकता है। हालांकि, किसी नए उत्पादन संयंत्र की वास्तविक क्षमता, ड्रोन के प्रकार और पाकिस्तान की सैन्य तैनाती से जुड़े ठोस आंकड़े सामने आने के बाद ही उसके रणनीतिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

Powerus का भारत के साथ भी कारोबारी संबंध है। 30 जून 2026 को Paras Defence and Space Technologies ने बताया था कि उसने अमेरिकी कंपनी की सहायक इकाई Tandem Defense से Guardian-1 Interceptor तकनीक के निर्माण और व्यावसायीकरण के लिए विशेष लाइसेंस समझौता किया है।

Guardian-1 एक काउंटर-ड्रोन इंटरसेप्टर सिस्टम है, जिसे कम लागत वाले हवाई खतरों को रोकने के लिए विकसित किया गया है। समझौते के तहत Paras Defence को भारत में इस तकनीक के निर्माण और व्यावसायीकरण के विशेष अधिकार दिए गए हैं।

इस तरह Powerus से जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल भारत में काउंटर-ड्रोन क्षमता के लिए किया जा रहा है, जबकि कंपनी ने पाकिस्तान के साथ सैन्य ड्रोन और स्थानीय उत्पादन को लेकर समझौता किया है। यह दोनों देशों के बीच ड्रोन तकनीक के अलग-अलग उपयोगों का एक उदाहरण है।

Powerus के पाकिस्तान के साथ समझौते को अभी अंतिम बिक्री या पूर्ण उत्पादन अनुबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कंपनी के अनुसार, MoU खरीद की बाध्यता पैदा नहीं करता और आगे की गतिविधियां लागू अमेरिकी कानूनों तथा आवश्यक सरकारी मंजूरियों के अधीन हैं।

इसका मतलब है कि पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने से पहले तकनीकी, नियामकीय और कारोबारी स्तर पर कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

आधुनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहा है। छोटे UAV, इंटरसेप्टर ड्रोन, लंबी दूरी के ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियां सैन्य अभियानों का हिस्सा बन रही हैं। कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल महंगे रक्षा हथियारों को चुनौती देने के लिए भी किया जा सकता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में हुए सैन्य तनाव ने इस बदलती तकनीकी वास्तविकता को सामने रखा। भारत सरकार के अनुसार, उस दौरान Counter-UAS और एयर डिफेंस नेटवर्क ने पाकिस्तान की ओर से आए ड्रोन एवं मिसाइल खतरों को रोकने में भूमिका निभाई।

ऐसे में पाकिस्तान में किसी अमेरिकी तकनीक आधारित ड्रोन उत्पादन क्षमता का विस्तार भारत के लिए निगरानी का विषय रहेगा। लेकिन इसका वास्तविक सुरक्षा प्रभाव उत्पादन की मात्रा, ड्रोन की क्षमता, उनके उपयोग और पाकिस्तान की सैन्य रणनीति पर निर्भर करेगा।

Powerus और पाकिस्तान सेना के बीच सितंबर में हुआ MoU एक प्रारंभिक ढांचा है। आगे साइट चयन, उत्पादन क्षमता, तकनीकी हस्तांतरण, अमेरिकी सरकारी मंजूरियां और अंतिम कारोबारी समझौते जैसे चरण महत्वपूर्ण होंगे। दूसरी ओर, भारत पहले से ही Counter-UAS और बहुस्तरीय एयर डिफेंस क्षमता विकसित कर रहा है। 2025 के सैन्य घटनाक्रम के बाद भारत ने स्वदेशी UAV और Counter-UAS तकनीक में आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया है।

इसलिए पाकिस्तान में Powerus से जुड़ी संभावित ड्रोन निर्माण गतिविधि को भारत-पाकिस्तान के व्यापक सुरक्षा समीकरण के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसके आधार पर किसी निश्चित सैन्य परिणाम या भविष्य के हमले की भविष्यवाणी करना अभी उचित नहीं होगा।

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