तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित श्री लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर अपनी भव्यता और 1500 किलो शुद्ध सोने के उपयोग के कारण खास पहचान रखता है। यह मंदिर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से अधिक सोने से निर्मित है और आस्था, वास्तुकला व आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम माना जाता है।
Vellore Golden Temple: तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में स्थित श्री लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर भारत के सबसे भव्य धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। वर्ष 2001 में शुरू हुए निर्माण के बाद 2007 में उद्घाटित यह मंदिर देवी लक्ष्मी नारायणी को समर्पित है। इसमें लगभग 1500 किलो शुद्ध सोने का उपयोग किया गया है, जो इसे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से भी अलग पहचान देता है। पहाड़ियों की तलहटी में बना यह मंदिर न केवल पूजा स्थल है, बल्कि वास्तुकला और आध्यात्मिक साधना का अनोखा केंद्र भी माना जाता है।
1500 किलो सोने से बनी अद्भुत पहचान
श्री लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वर्ण आवरण है। जहां अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में करीब 900 किलो सोने का उपयोग हुआ है, वहीं वेल्लोर के इस मंदिर में लगभग 1500 किलो शुद्ध सोना लगाया गया है। अनुमान के मुताबिक, इसकी कीमत दो हजार करोड़ रुपये से भी अधिक बताई जाती है।
मंदिर निर्माण में सोने की पतली पन्नियों को तांबे की नक्काशीदार प्लेटों पर चढ़ाया गया है। इन पर 9 से 10 परतों में स्वर्ण आवरण किया गया है, जिसकी डिजाइन वेदों और प्राचीन ग्रंथों से प्रेरित मानी जाती है। धूप पड़ते ही मंदिर की दीवारें और शिखर स्वर्णिम आभा से जगमगा उठते हैं।

सात साल में तैयार हुई भव्य रचना
इस मंदिर का निर्माण वर्ष 2001 में शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में करीब सात साल का समय लगा। 24 अगस्त 2007 को इसका भव्य उद्घाटन ‘महा कुंभाभिषेकम’ के साथ किया गया। मंदिर का प्रबंधन श्री नारायणी पीठम द्वारा किया जाता है, जो धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय है।
मंदिर का प्रवेश मंडप, मीनार और प्रमुख संरचनाएं पूरी तरह सोने से आच्छादित हैं। पहाड़ियों की तलहटी में बसे इस परिसर का शांत वातावरण इसे एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
श्री चक्र मार्ग और आध्यात्मिक यात्रा
श्री लक्ष्मी नारायणी स्वर्ण मंदिर की बनावट सिर्फ भव्यता तक सीमित नहीं है। मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 1.8 किलोमीटर लंबे तारा-आकार के ‘श्री चक्र’ मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है। इस मार्ग के चारों ओर हरियाली और शांति का माहौल है।
चलते समय दीवारों पर लिखे आध्यात्मिक संदेश और जीवन मूल्यों से जुड़े विचार श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन का अवसर देते हैं। यह यात्रा दर्शन से पहले ही मन को शांत और एकाग्र करने का काम करती है।
देवी श्री लक्ष्मी नारायणी को समर्पित यह स्वर्ण मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला, आध्यात्मिक सोच और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। यहां आने वाले श्रद्धालु न सिर्फ देवी के दर्शन करते हैं, बल्कि शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव भी साथ लेकर लौटते हैं। अगर आप भारत के अनोखे और भव्य धार्मिक स्थलों के बारे में जानना चाहते हैं, तो वेल्लोर का यह स्वर्ण मंदिर जरूर आपकी सूची में होना चाहिए। ऐसे ही धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की अपडेटेड जानकारी के लिए हमारी पूरी रिपोर्ट पढ़ते रहें।











