BMC चुनाव 2026 में 227 सीटों पर सभी बड़े दल मैदान में हैं। बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना महायुति के तहत ताकत दिखा रही हैं, जबकि कांग्रेस, NCP और MNS अलग रणनीति के साथ अल्पसंख्यक और मराठी वोट बैंक को साधने में जुटी हैं।
BMC Election: मुंबई महानगरपालिका यानी BMC चुनाव इस बार सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति का सेमीफाइनल माना जा रहा है। 227 वार्डों में होने वाले इस चुनाव में हर पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। सीटों का बंटवारा, उम्मीदवारों का चयन और समुदाय आधारित रणनीति ने इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। बीजेपी, शिवसेना, कांग्रेस, NCP और MNS सभी अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटी हैं।
महायुति बनाम बिखरा विपक्ष, सीधा और परोक्ष मुकाबला
BMC चुनाव में सीधा मुकाबला महायुति और महाविकास अघाड़ी के बिखरे दलों के बीच है। महायुति में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना शामिल हैं, जबकि विपक्ष में उद्धव ठाकरे गुट, कांग्रेस, शरद पवार गुट की NCP, MNS और वंचित बहुजन आघाड़ी अलग-अलग मैदान में हैं। यह बिखराव विपक्ष के लिए चुनौती और महायुति के लिए मौका माना जा रहा है।
महायुति का सीट बंटवारा और रणनीति
लंबी खींचतान के बाद महायुति में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने सीटों का बंटवारा फाइनल किया। बीजेपी 137 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना 90 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है। दोनों दलों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि गठबंधन में सब कुछ कंट्रोल में है और लक्ष्य BMC पर कब्जा करना है।
बीजेपी ने इस बार शहरी मध्यम वर्ग, उत्तर भारतीय वोटर्स और अमराठी समुदाय पर बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने कुल 137 उम्मीदवारों में से करीब 40 उम्मीदवार उत्तर भारतीय या अमराठी पृष्ठभूमि से उतारे हैं। मुस्लिम और क्रिश्चियन समुदाय से केवल एक-एक उम्मीदवार को टिकट दिया गया है, जिससे साफ है कि बीजेपी ने कोर वोट बैंक को प्राथमिकता दी है।
शिंदे गुट की शिवसेना का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला
एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। इस गुट ने मराठी वोट के साथ-साथ मुस्लिम और उत्तर भारतीय समुदाय को भी साधने की कोशिश की है। शिंदे गुट ने 10 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि 4 उम्मीदवार उत्तर भारतीय या अमराठी पृष्ठभूमि से हैं। यह रणनीति साफ तौर पर मुंबई के मिश्रित जनसंख्या वाले वार्डों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
NCP अजीत पवार गुट का अलग रास्ता और महिला कार्ड
महायुति से अलग होकर अजीत पवार गुट की NCP 94 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। तकनीकी कारणों से एक सीट रद्द हो गई है, लेकिन इसके बावजूद यह संख्या काफी अहम मानी जा रही है। अजीत पवार ने इस चुनाव में महिला कार्ड खेलते हुए 52 महिला उम्मीदवार उतारे हैं। इसके अलावा 22 मुस्लिम, 10 उत्तर भारतीय या अमराठी और 1 क्रिश्चियन उम्मीदवार को टिकट दिया गया है। यह साफ संकेत है कि अजीत पवार गुट अल्पसंख्यक और महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहा है।
उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना का आक्रामक स्टैंड
उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना इस चुनाव में सबसे ज्यादा 163 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने खुद को असली शिवसेना और मराठी अस्मिता का असली प्रतिनिधि बताने की रणनीति अपनाई है। उम्मीदवारों की लिस्ट में 10 मुस्लिम, 1 उत्तर भारतीय और 1 क्रिश्चियन उम्मीदवार शामिल हैं। बाकी सीटों पर मराठी चेहरों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि कोर वोट बैंक को मजबूत किया जा सके।
कांग्रेस का अकेले मैदान में उतरना
कांग्रेस इस बार किसी गठबंधन में नहीं है और स्वतंत्र रूप से 167 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। यह फैसला कांग्रेस के लिए जोखिम भरा जरूर है, लेकिन पार्टी इसे संगठन मजबूत करने का मौका मान रही है। कांग्रेस का फोकस अल्पसंख्यक, दलित और शहरी गरीब वोटर्स पर है। पार्टी की रणनीति है कि बिखरे विपक्ष का फायदा उठाकर वह अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करे।
मनसे का सीमित लेकिन असरदार खेल
राज ठाकरे की मनसे 53 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी का फोकस मराठी वोट बैंक पर है, लेकिन उसने मुस्लिम समुदाय से भी 2 उम्मीदवार उतारे हैं। इसके अलावा 1 उत्तर भारतीय उम्मीदवार को टिकट दिया गया है। मनसे का प्रभाव सीमित है, लेकिन कुछ वार्डों में वह गेम चेंजर साबित हो सकती है।
शरद पवार गुट की NCP और अन्य छोटे दल
शरद पवार गुट की NCP केवल 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इसमें 1 मुस्लिम और 2 उत्तर भारतीय या अमराठी उम्मीदवार शामिल हैं। वंचित बहुजन आघाड़ी 46 सीटों पर मैदान में है और खुद को दलित-बहुजन राजनीति के विकल्प के रूप में पेश कर रही है। इसके अलावा छोटी सहयोगी पार्टियों को 7 सीटें दी गई हैं और 7 जगहों पर उम्मीदवार नहीं उतारे गए हैं। कुछ वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देने का फैसला भी किया गया है।
समुदाय आधारित टिकट वितरण का पूरा गणित
इस BMC चुनाव में हर पार्टी ने टिकट वितरण के जरिए साफ संदेश देने की कोशिश की है। बीजेपी और उद्धव गुट ने मराठी और उत्तर भारतीय वोटर्स पर जोर दिया है। शिंदे गुट और अजीत पवार गुट ने मुस्लिम समुदाय को ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर संतुलन बनाने की कोशिश की है। कांग्रेस और VBA सामाजिक न्याय के एजेंडे पर फोकस कर रही हैं।











