Nitish Kumar का बिहार से Rajya Sabha जाना लगभग तय माना जा रहा है। जैसे ही वे राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित होंगे, उनकी Bihar Legislative Council वाली MLC सीट खाली हो जाएगी।
पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी विधानपरिषद (MLC) वाली सीट खाली होगी, और इसी सीट से उनके बेटे निशांत कुमार को बिहार की राजनीति में प्रवेश दिलाने की रणनीति तैयार की गई है। यह कदम JDU के लिए न केवल पार्टी के भीतर संतुलन बनाने वाला है, बल्कि भविष्य में सत्ता का नया चेहरा तैयार करने का संकेत भी है।
नीतीश कुमार की MLC सीट का महत्व
नीतीश कुमार ने साल 2006 में पहली बार बिहार विधानपरिषद में कदम रखा। तब से लेकर अब तक नीतीश लगातार इस सीट पर बने रहे। उन्होंने 2012, 2018 और 2024 में भी निर्विरोध MLC का चुनाव जीता। उनकी इस सीट का कार्यकाल अब 2030 तक बचा हुआ है, और इसी कार्यकाल का फायदा उठाकर JDU निशांत कुमार को विधानपरिषद में प्रवेश दिलाने की योजना बना रही है।
नीतीश के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनकी MLC सीट खाली हो जाएगी। JDU का लक्ष्य यही है कि निशांत कुमार इस सीट से राजनीति में कदम रखें, और लंबे समय तक पार्टी और सरकार में अपनी पकड़ मजबूत करें।
निशांत कुमार का सत्ता में प्रवेश

सूत्रों के मुताबिक, JDU के नेतृत्व ने निशांत कुमार को पार्टी में शामिल करने के बाद यह सुनिश्चित किया है कि उनके लिए विधानपरिषद में कोई ऐसी सीट मिले जहाँ चुनाव में कोई अड़चन न आए। MLC सीट का कार्यकाल लंबा होने की वजह से निशांत कुमार लगभग 2030 तक विधानपरिषद में बने रह सकते हैं। इस तरह निशांत कुमार को न केवल राजनीतिक अनुभव मिलेगा, बल्कि पार्टी और सरकार में उनकी पैठ भी मजबूत होगी।
उनके लिए यह रास्ता नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर का निरंतर विस्तार साबित होगा। सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार को सत्ता में लाने को लेकर तीन संभावित फॉर्मूले चल रहे हैं:
- पहले जनता के सामने लाना – निशांत को पहले विधानपरिषद में भेजा जाए और धीरे-धीरे उनकी ताजपोशी कराई जाए।
- अनुभवी डिप्टी सीएम के साथ उप मुख्यमंत्री बनाना – ताकि निशांत राजनीति और प्रशासनिक कामकाज दोनों को सीख सकें।
- सीधे भविष्य के सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करना – हालांकि यह विकल्प फिलहाल कम संभावित माना जा रहा है।
इन विकल्पों में से कोई भी चुना जाएगा, तो JDU के समर्थक वर्ग को भी संतुष्ट किया जा सकेगा और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर असंतोष नहीं फैलेगा।NDA सूत्रों का कहना है कि निशांत कुमार को विधानपरिषद की MLC सीट से उतारकर पार्टी की राजनीतिक स्थिरता और सत्ता में निरंतरता बनाए रखने की योजना है। इससे निशांत को केवल राजनीतिक पहचान नहीं मिलेगी, बल्कि 2030 तक बिहार में उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत रहेगी।












