पश्चिम एशिया तनाव के बीच निफ्टी 200-DMA से नीचे फिसला है। 50 में से 29 प्रमुख शेयर अहम तकनीकी स्तर के नीचे कारोबार कर रहे हैं। विशेषज्ञ 24,000 को महत्वपूर्ण सपोर्ट मान रहे हैं और सतर्क रणनीति की सलाह दे रहे हैं।
Stock Market: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में Nifty 50 में तेज गिरावट दर्ज की गई है। यह सूचकांक अपने 200-डे मूविंग एवरेज यानी 200-DMA के 25,345 अंक के स्तर से करीब 1,000 अंक नीचे कारोबार कर रहा है। पिछले शुक्रवार को इस अहम तकनीकी स्तर को पहली बार तोड़ा गया था, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
200-DMA को बाजार में लंबी अवधि का मजबूत सपोर्ट माना जाता है। जब कोई प्रमुख इंडेक्स इस स्तर से नीचे जाता है तो इसे कमजोरी का संकेत माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब बेचने का समय आ गया है या यह गिरावट खरीदारी का मौका है।
24,000 का स्तर क्यों अहम
विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल 24,000 का स्तर निफ्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सपोर्ट है। अल्फानिटी फिनटेक के को-फाउंडर और डायरेक्टर यू. आर. भट्ट का कहना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो बाजार में और गिरावट संभव है। हालांकि उन्हें परमाणु युद्ध जैसी चरम स्थिति की संभावना कम लगती है।
उनके अनुसार यदि तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर पड़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है तो निफ्टी 23,500 से 23,700 के स्तर तक भी फिसल सकता है। यह स्तर शॉर्ट टर्म में अगला मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।
50 में से 29 शेयर 200-DMA के नीचे
तकनीकी आंकड़ों के अनुसार Nifty 50 के 50 में से 29 शेयर अपने 200-DMA से नीचे कारोबार कर रहे हैं। यह दिखाता है कि गिरावट केवल इंडेक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर कमजोरी है।
इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं जैसे Infosys, Bharti Airtel, ITC, Hindustan Unilever, Bajaj Finance, HDFC Bank, ICICI Bank, Reliance Industries और Eternal। ये सभी अपने-अपने सेक्टर के बड़े और मजबूत माने जाने वाले शेयर हैं। जब ऐसे दिग्गज स्टॉक 200-DMA से नीचे जाते हैं तो बाजार का सेंटीमेंट कमजोर माना जाता है।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
पिछले दो सत्रों में सबसे ज्यादा दबाव Larsen & Toubro और InterGlobe Aviation पर देखा गया। दोनों शेयर करीब 11 प्रतिशत तक टूटे, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 लगभग 3.4 प्रतिशत गिरा।
इसके अलावा Adani Ports, Tata Motors, Shriram Finance, Asian Paints, Maruti Suzuki, Adani Enterprises, Bajaj Finserv, Tata Steel, Jio Financial Services, Mahindra & Mahindra, UltraTech Cement और Eicher Motors जैसे शेयरों में 5 से 7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
इससे साफ है कि गिरावट सेक्टर विशेष तक सीमित नहीं है। बैंकिंग, ऑटो, मेटल, इंफ्रा और फाइनेंशियल सर्विसेज सभी पर दबाव है।
तकनीकी संकेतक क्या कह रहे हैं
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदी आर के अनुसार यदि घबराहट में बिकवाली और बढ़ती है तो 24,200 से 24,000 का स्तर अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट हो सकता है।
तकनीकी संकेतकों की बात करें तो रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 36 के आसपास है। यह ओवरसोल्ड जोन के करीब है, लेकिन अभी तक स्पष्ट रिवर्सल का संकेत नहीं दे रहा है।
MACD भी निगेटिव ट्रेंड दिखा रहा है, जो गिरावट की मजबूती को दर्शाता है। उनका कहना है कि जब तक निफ्टी 25,300 के ऊपर मजबूती से वापस नहीं जाता, तब तक बाजार में स्थिरता की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। फिलहाल “रैली पर बेचने” की रणनीति को बेहतर माना जा रहा है।
क्या हर गिरावट में बेच देना चाहिए
ऐसे समय में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या अब स्टॉक्स बेच देना चाहिए। वैलेंटिस एडवाइजर्स के फाउंडर ज्योतिवर्धन जयपुरिया का कहना है कि पिछले 25 वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि किसी भी सैन्य तनाव के बाद बाजार पहले गिरता है, लेकिन कुछ महीनों में संभल भी जाता है।
औसतन करीब 6 प्रतिशत की गिरावट के बाद बाजार लगभग एक महीने के भीतर पुराने स्तर पर लौट आता है। इसका मतलब यह है कि हर गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए नुकसानदायक नहीं होती।
जयपुरिया का कहना है कि वह इस गिरावट में धीरे-धीरे निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। हालांकि तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि वही इस समय बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।












