तमिलनाडु चुनाव 2026: 29 सीट और 2 राज्यसभा सीट के प्रस्ताव पर अटका मामला, चिदंबरम-स्टालिन बैठक के बाद बढ़ा सस्पेंस

तमिलनाडु चुनाव 2026 से पहले DMK और कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर खींचतान तेज। 29 सीट और 2 राज्यसभा सीट का ऑफर, P. Chidambaram व M. K. Stalin की अहम बैठक।

तमिलनाडु चुनाव 2026 से पहले DMK और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत तेज हुई। P. Chidambaram ने M. K. Stalin से मुलाकात की। DMK ने 29 सीट और 2 राज्यसभा सीट का प्रस्ताव दिया है।

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की प्रमुख पार्टियां अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इसी बीच कांग्रेस और डीएमके के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अहम बातचीत हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता P. Chidambaram ने मुख्यमंत्री M. K. Stalin से मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

करीब एक घंटे तक चली इस मीटिंग में आगामी चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि बैठक के बाद पी चिदम्बरम ने मीडिया से कोई बयान नहीं दिया, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है।

पी चिदम्बरम को क्यों भेजा गया

अब तक डीएमके के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत कांग्रेस की ओर से तमिलनाडु के AICC इंचार्ज गिरीश चोडांकर कर रहे थे। वे कांग्रेस की सीट-शेयरिंग कमिटी के प्रमुख के तौर पर बातचीत संभाल रहे थे। लेकिन सूत्रों के अनुसार उनकी बातचीत के अंदाज और टोन को लेकर डीएमके नेतृत्व ने आपत्ति जताई थी।

इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने अपनी रणनीति बदली और अनुभवी नेता पी चिदम्बरम को सीधे बातचीत के लिए आगे किया। चिदम्बरम तमिलनाडु की राजनीति को गहराई से समझते हैं और डीएमके नेतृत्व के साथ उनके व्यक्तिगत समीकरण भी बेहतर माने जाते हैं। यही वजह है कि हाईकमान ने उन्हें इस अहम जिम्मेदारी के लिए चुना।

कांग्रेस की शुरुआती मांग और बदलाव

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सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने शुरुआत में सत्ता में साझेदारी की भी इच्छा जताई थी। हालांकि अब पार्टी ने अपने रुख में बदलाव किया है और केवल ज्यादा सीटों की मांग तक खुद को सीमित कर लिया है। पहले कांग्रेस 41 सीटों की मांग पर अड़ी हुई थी। बाद में यह संख्या घटाकर 36 कर दी गई।

कांग्रेस का तर्क है कि वह राज्य में अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ा चुकी है और पिछले चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन की स्थिति में है। इसलिए उसे अधिक सीटें मिलनी चाहिए ताकि वह गठबंधन में मजबूत भागीदारी निभा सके।

डीएमके का स्पष्ट रुख

दूसरी ओर Dravida Munnetra Kazhagam यानी डीएमके ने साफ कर दिया है कि वह पिछली बार दी गई 25 सीटों से एक भी सीट ज्यादा देने की स्थिति में नहीं है। पार्टी का मानना है कि गठबंधन की मजबूती के लिए संतुलन जरूरी है और सीटों का बंटवारा उसी आधार पर होना चाहिए।

सूत्रों का कहना है कि डीएमके ने कांग्रेस को यह भी विकल्प दिया है कि यदि वह चाहे तो एक अतिरिक्त राज्यसभा सीट पर विचार किया जा सकता है। लेकिन विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर पार्टी फिलहाल तैयार नहीं दिख रही है।

29 सीट और 2 राज्यसभा सीट का फाइनल ऑफर

चिदम्बरम और स्टालिन की बैठक के बाद जो संकेत सामने आए हैं, उनके अनुसार डीएमके ने कांग्रेस को 29 विधानसभा सीटें और 2 राज्यसभा सीटों का ऑफर दिया है। इसे अंतिम प्रस्ताव माना जा रहा है। अब यह फैसला कांग्रेस नेतृत्व को करना है कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है या फिर आगे बातचीत जारी रखती है।

सोमवार को डीएमके ने कांग्रेस को दो टूक संदेश दिया था कि यदि वह 25 सीटों के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं है तो वह गठबंधन से बाहर जाने के लिए स्वतंत्र है। इस बयान ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए थे।

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