सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों को टी-20 क्रिकेट का उदाहरण देते हुए महत्वपूर्ण सलाह दी। उनका कहना है कि किसी भी पेशे में हर काम में माहिर होना जरूरी नहीं है, बल्कि अपनी क्षमता और विशेषज्ञता को पहचानकर उसी में पहचान बनाना ही सफलता की कुंजी है।
नई दिल्ली: सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, ने वकालत की पढ़ाई कर रहे छात्रों को टी-20 क्रिकेट का उदाहरण देते हुए महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोई भी वकील लॉ प्रोफेशन के हर क्षेत्र में निपुण नहीं हो सकता, इसलिए छात्रों को अपनी क्षमता और रुचि को पहचानकर उसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करनी चाहिए और अपनी पहचान बनानी चाहिए।
इस दौरान सूर्यकुमार यादव और जसप्रीत बुमराह का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे क्रिकेट में हर खिलाड़ी हर स्थिति में विशेषज्ञ नहीं होता, वैसे ही लॉ के प्रोफेशन में भी किसी को अपनी ताकत और विशेषज्ञता वाले क्षेत्र पर फोकस करना चाहिए। यह संदेश छात्रों को पेशेवर दिशा और आत्मविश्वास के साथ अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।
T-20 क्रिकेट के उदाहरण से समझाई बात
सीजेआई सूर्यकांत ने गांधीनगर में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की 16वीं कोन्वोकेशन सेरेमनी में अपने संबोधन में कहा कि जैसे टी-20 क्रिकेट के आखिरी ओवर्स में आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि सूर्यकुमार यादव बोलिंग करें या जसप्रीत बुमराह बल्लेबाजी करें, वैसे ही लॉ के पेशे में हर वकील से हर क्षेत्र में निपुण होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा, टी-20 में खिलाड़ी अपनी विशेषता वाले क्षेत्र में खेलते हैं। सूर्यकुमार यादव बल्लेबाजी में माहिर हैं, जबकि बुमराह गेंदबाजी में। इसी तरह, लॉ के क्षेत्र में भी आपको यह पहचान करनी होगी कि आपकी क्षमता किस हिस्से में अधिक है और उसी क्षेत्र में पेशेवर पहचान बनानी चाहिए।

वकीलों के लिए सलाह
सीजेआई ने छात्रों को सलाह दी कि शुरुआती दिनों में कानून की पढ़ाई और वास्तविक प्रैक्टिस के बीच अंतर स्पष्ट हो जाता है। किताबें सैद्धांतिक समझ देती हैं, लेकिन व्यावहारिक अनुभव में अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यवहारिक बाधाओं के बीच काम करने की क्षमता जरूरी होती है। उन्होंने कहा, “लीगल प्रोफेशन में जनता का विश्वास वकील की ईमानदारी और निरंतरता पर निर्भर करता है।
जो वकील हर काम को समान रूप से करने की कोशिश करते हैं, उन्हें शायद ही कभी पुरस्कृत किया जाता है। असली सफलता उन्हें मिलती है जो अपनी क्षमता और रुचि के क्षेत्र को समझकर उसी में उत्कृष्टता हासिल करते हैं।”
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जो वकील समय के साथ अपनी विशेषज्ञता की दिशा पहचानते हैं, वही फेमस होते हैं। उनका मार्ग आसान नहीं होता; लेकिन निरंतर अभ्यास, धैर्य और सही दिशा में प्रयास उन्हें मुकाम तक पहुंचाता है। उन्होंने छात्रों को यह भी चेताया कि प्रारंभिक दिनों में हताशा होना स्वाभाविक है, लेकिन स्थिरता और ईमानदारी से ही पेशे में मजबूत पहचान बनती है।











