राजस्थान की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई ने नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के नेतृत्व में जारी 154 सदस्यों की सूची को संगठनात्मक मजबूती और आंतरिक एकजुटता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
जयपुर: राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से प्रतीक्षित संगठनात्मक बदलावों पर आखिरकार मुहर लग गई है। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देश पर जारी नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस फेरबदल के जरिए भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है।
पहला, गुटबाजी की अटकलों पर विराम लगाते हुए संगठन में एकजुटता का संदेश देना और दूसरा, आगामी चुनावी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अनुभवी और सक्रिय चेहरों को जिम्मेदारी देकर मजबूत टीम तैयार करना।
12 स्थायी आमंत्रित सदस्य, अनुभवी नेतृत्व को प्राथमिकता
प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी द्वारा जारी सूची में 12 वरिष्ठ नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। इनमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, अरुण चतुर्वेदी और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ जैसे अनुभवी चेहरे शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम संगठन में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को मजबूत बनाए रखने और उनके अनुभव का लाभ उठाने की रणनीति का हिस्सा है।
भाजपा ने राज्य और केंद्र के बीच समन्वय मजबूत रखने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी है। स्थायी आमंत्रित सदस्यों में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भूपेंद्र यादव, अर्जुनराम मेघवाल, भागीरथ चौधरी और रवनीत सिंह बिट्टू को शामिल किया गया है। इस निर्णय को केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और संगठन को राष्ट्रीय रणनीति से जोड़कर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

154 सदस्यीय कार्यसमिति में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन
नई कार्यसमिति में कुल 154 सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें 90 प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और 52 विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। विशेष आमंत्रित सदस्यों में पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व मंत्री शामिल हैं, जिनका जनाधार और अनुभव संगठन के लिए उपयोगी माना जा रहा है। पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया है। प्रत्येक जिले से 2 से 4 सक्रिय नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जिससे राज्यभर में संगठन की पकड़ मजबूत हो सके।
इस सूची में 20 महिलाओं को स्थान देकर भाजपा ने महिला प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी है। इसे आधी आबादी को संगठनात्मक नेतृत्व में शामिल करने की दिशा में सकारात्मक पहल माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि महिला भागीदारी बढ़ाने से पार्टी को जमीनी स्तर पर व्यापक समर्थन मिल सकता है, खासकर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में।
गुटबाजी पर विराम और ‘मिशन 2028’ की तैयारी
राजस्थान भाजपा में पिछले कुछ समय से गुटबाजी की चर्चाएं सामने आती रही थीं। नई कार्यसमिति में सभी प्रमुख धड़ों और वरिष्ठ नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। अनुभवी नेतृत्व और नए चेहरों के संयोजन से पार्टी ‘मिशन 2028’ के लिए मजबूत आधार तैयार करना चाहती है।











