भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रचारकों की कमी से जूझ रही है। कई राज्यों में आरएसएस के लिए रिज़र्व संगठन महामंत्री (महासचिव-संगठन) के पद अभी खाली हैं।
नई दिल्ली: भारत की राजनीति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच समन्वय हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। 13 मार्च से हरियाणा के पानीपत के पास समालखा में होने जा रही आरएसएस की शीर्ष निर्णयकारी बैठक में संगठनात्मक बदलावों पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। इस बैठक में संघ प्रमुख Mohan Bhagwat के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Naveen भी शामिल होंगे। यह तीन दिवसीय बैठक ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ (ABPS) की है, जिसे आरएसएस की सर्वोच्च नीति-निर्धारण संस्था माना जाता है।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा: क्यों है अहम?
Rashtriya Swayamsevak Sangh की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा वह मंच है जहां संगठन से जुड़े बड़े रणनीतिक और वैचारिक फैसले लिए जाते हैं।इस वर्ष की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भाजपा में कई राज्यों में महासचिव (संगठन) के पद खाली हैं। ये पद परंपरागत रूप से संघ के पूर्णकालिक प्रचारकों को सौंपे जाते हैं, जो पार्टी और संघ के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व को उम्मीद है कि इस बैठक में इन पदों को भरने पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
किन राज्यों में खाली हैं संगठन महामंत्री के पद?
वर्तमान में केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में भाजपा के महासचिव (संगठन) के पद रिक्त हैं। ये पद संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि महासचिव (संगठन) न केवल पार्टी की रणनीति लागू करते हैं, बल्कि संघ की विचारधारा और कार्यशैली को जमीनी स्तर पर समन्वित भी करते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर यह जिम्मेदारी फिलहाल B. L. Santhosh निभा रहे हैं। परंपरा के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय संगठन महामंत्री भी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में भाग लेते हैं।

प्रचारकों की कमी: RSS के सामने चुनौती
संघ नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि पूर्णकालिक प्रचारकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। 2025 में संघ के सह-सरकार्यवाह Arun Kumar ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि संघ के विभिन्न संगठनों और विस्तार होते कार्यक्षेत्र के कारण प्रचारकों की मांग बढ़ी है, जबकि उपलब्ध संख्या सीमित है।
प्रचारक संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता होते हैं, जिन्हें विभिन्न संगठनों और राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी जाती है। भाजपा में उनकी भूमिका रणनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अहम होती है।
संभावित फेरबदल और नई नियुक्तियां
सूत्रों के मुताबिक, मार्च माह में संघ अपने विभिन्न संगठनों में कार्यरत प्रचारकों की ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग’ जैसी प्रक्रिया अपनाता है। लंबे समय से एक राज्य में कार्यरत प्रचारकों को नई जिम्मेदारियां दी जाती हैं। चर्चा है कि राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष की संघ में वापसी भी संभव है। उनकी जगह सह-संगठन महामंत्री शिव प्रकाश को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
इसके अलावा बिहार-झारखंड क्षेत्र के प्रचारक नागेंद्र सिंह का नाम भी संभावित दावेदारों में बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में ही लिया जाएगा।












