असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेन बोरा ने 32 सालों बाद पार्टी छोड़ी और BJP में शामिल हो गए। उनके साथ युवा नेता संजू बरुआ और सर्बनारायण देवरी भी शामिल हुए। कदम ने असम की राजनीति और कांग्रेस में हलचल मचा दी।
Assam Politics: असम की राजनीति में रविवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब 32 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता भूपेन कुमार बोरा ने आधिकारिक रूप से Bharatiya Janata Party (BJP) में शामिल होने का फैसला किया। गुवाहाटी में असम बीजेपी चीफ Dilip Saikia की मौजूदगी में भूपेन बोरा ने पार्टी की सदस्यता ली। उनके साथ युवा कांग्रेस नेता संजू बरुआ और सर्बनारायण देवरी भी बीजेपी में शामिल हुए। इस कदम ने असम कांग्रेस में हलचल मचा दी है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
कौन हैं भूपेन बोरा
भूपेन बोरा एक अनुभवी और संगठनात्मक रूप से मजबूत नेता हैं। वे पिछले 32 सालों से कांग्रेस से जुड़े हुए थे और पार्टी में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। बोरा 2006 से 2016 तक बिहपुरिया विधानसभा सीट से विधायक रहे। इसके अलावा वे 2021 से 2024 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष भी रहे।
राजनीति में उनके करियर की शुरुआत छात्र संगठन से हुई थी। डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी में उन्होंने यूनियन के जनरल सेक्रेटरी के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने तरुण गोगोई सरकार में सरकार के प्रवक्ता और पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी के रूप में भी योगदान दिया। दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal उनके विश्वविद्यालय के सहपाठी भी रहे।
कांग्रेस छोड़ने की वजह
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भूपेन बोरा ने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान के कारण लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस की वास्तविक कमान सांसद Rakibul Hussain के हाथों में है, जबकि स्टेट यूनिट चीफ Gaurav Gogoi केवल नाममात्र के पद पर हैं।
भूपेन बोरा का कहना है कि पार्टी के भीतर इस तरह की संगठनात्मक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे इस्तीफा दें और नई राजनीतिक राह चुनें। रकीबुल हुसैन ने फिलहाल इन आरोपों पर कोई सीधा बयान नहीं दिया है।
कांग्रेस के लिए बड़ा झटका
भूपेन बोरा कांग्रेस के लिए केवल एक नेता नहीं, बल्कि संगठनात्मक रीढ़ की हड्डी माने जाते थे। उन्होंने छात्र संगठन एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और फिर स्टेट कांग्रेस तक का सफर तय किया। वे एआईसीसी के सचिव भी रहे और असम के साथ-साथ उत्तर-पूर्वी राज्यों में पार्टी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।
उनके नेतृत्व में पिछले साल कांग्रेस ने असम में तीन लोकसभा सीटें जीती थीं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उनका बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से बड़ा झटका साबित हो सकता है। पार्टी के भीतर यह कदम संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक संघर्ष को भी उजागर करता है।
बीजेपी के लिए फायदा
भूपेन बोरा का बीजेपी में शामिल होना राज्य की राजनीति में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है। उनकी 32 साल की राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता पार्टी को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में फायदा पहुंचा सकती है।
भूपेन बोरा युवा नेताओं के लिए भी मार्गदर्शन कर सकते हैं और पार्टी के कार्यकर्ताओं को मजबूत संगठनात्मक दिशा दे सकते हैं। उनके आने से बीजेपी की असम इकाई को नई ऊर्जा और रणनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है।








