भारत अब Apple का नया पावर हाउस बन चुका है। 2025 में भारत से iPhone का एक्सपोर्ट 2.03 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अमेरिका में बिकने वाले iPhone का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है। अगर 500% टैरिफ लागू होता है, तो इसका असर सीधे अमेरिकी ग्राहकों पर पड़ेगा, जबकि भारत की उत्पादन क्षमता मजबूत बनी रहेगी।
India Becomes Apple’s Manufacturing Hub: भारत Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा रहा है, 2025 में देश से iPhone का एक्सपोर्ट 2.03 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 23 अरब डॉलर पार कर गया। PLI स्कीम के तहत Apple ने चीन से हटकर भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाया, जिससे Foxconn और Tata की फैक्ट्रियों में बने iPhone सीधे अमेरिका और अन्य ग्लोबल मार्केट में जा रहे हैं। अमेरिकी बाजार में बिकने वाले iPhone का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है, इसलिए 500% टैरिफ का असर सीधे अमेरिकी ग्राहकों पर पड़ सकता है।
भारत बना Apple का नया पावर हाउस
2025 में भारत से iPhone का एक्सपोर्ट 2.03 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 23 अरब डॉलर पार कर गया। यह 2024 के मुकाबले लगभग 85 प्रतिशत ज्यादा है। PLI स्कीम के तहत Apple ने चीन से हटकर भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाया। Foxconn और Tata की फैक्ट्रियों में बने iPhone सीधे अमेरिका और ग्लोबल मार्केट में जा रहे हैं।
भारत अब Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। अमेरिका में बिकने वाले iPhone का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अब भारत से आता है। इसलिए अमेरिका अचानक सप्लाई चैन बदलना आसान नहीं समझ सकता।

500% टैरिफ का असली असर
अगर ट्रंप वाकई 500% टैरिफ लगाते हैं, तो इसका सीधा असर अमेरिकी ग्राहकों पर होगा। भारत की हिस्सेदारी इतनी बड़ी है कि कंपनियां बढ़ा हुआ टैक्स कीमतों में जोड़ देंगी। आज 1 लाख रुपये में बिकने वाला iPhone अमेरिका में कई गुना महंगा हो सकता है।
भारत की PLI स्कीम और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस ने Apple को पांच असेंबली प्लांट और 45 सप्लायर देने का अवसर दिया है। Apple ने iPhone 17 के सभी मॉडल भारत में बनाने शुरू कर दिए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई सुनिश्चित होती है।
भारत Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन में अब अहम भूमिका निभा रहा है। ट्रंप के 500% टैरिफ का असर सीधे अमेरिकी ग्राहकों पर पड़ेगा, जबकि भारत की उत्पादन क्षमता अमेरिका की निर्भरता को और बढ़ाती है। Apple की ग्लोबल रणनीति भारत को मजबूत बनाती है और अमेरिकी बाजार में अचानक बदलाव करना मुश्किल कर देती है।












