सुभाष बानूड़ा को कोर्ट में पेश कर रिकॉर्ड किया गया मुजरिम बयान, जाने अगली सुनवाई कब?

सुभाष बानूड़ा को कोर्ट में पेश कर रिकॉर्ड किया गया मुजरिम बयान, जाने अगली सुनवाई कब?
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सुभाष बानूड़ा 2018 में राजू ठेहट गैंग के मनोज ओला पर फायरिंग मामले में आरोपी है। नवंबर 2025 में उसने कोर्ट में सरेंडर किया था। अब अजमेर जेल में बंद बानूड़ा को अदालत में मुजरिम बयान के लिए लाया गया है।

Sikar: सीकर कोर्ट में सोमवार को आनंदपाल गैंग के गैंगस्टर सुभाष बानूड़ा को पेश किया गया। बानूड़ा को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल से लाया गया। पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। सुभाष बानूड़ा के एडवोकेट रघुनाथराम सुला ने बताया कि आरोपी को कोर्ट में मुजरिम बयान दर्ज कराने के लिए लाया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय की।

2018 की फायरिंग का मामला

सुभाष बानूड़ा पर आरोप है कि उसने साल 2018 में राजू ठेहट गैंग के सदस्य मनोज ओला पर फायरिंग की थी। यह घटना सीकर के उद्योग नगर थाना इलाके में झुंझुनूं बाइपास पर हुई। उस समय मनोज ओला एक दुकान में बैठे थे। इसी दौरान सामने से एक गाड़ी आई और उसमें से बदमाश बाहर उतरे। उन्होंने दुकान में प्रवेश कर मनोज ओला पर फायरिंग कर दी।

पुलिस ने इस मामले में सुभाष बानूड़ा समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। कोर्ट ने रामनिवास, पवन, नटवर और संदीप को बरी कर दिया। वहीं, सुभाष बानूड़ा को जमानत मिल गई। बाद में तय तारीख पर बानूड़ा और सीताराम सेवदा कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, इसलिए उन्हें फरार घोषित कर दिया गया।

नवंबर 2025 में सरेंडर

नवंबर 2025 में सुभाष बानूड़ा ने कोर्ट में सरेंडर किया। फिलहाल वह आनंदपाल को पुलिस कस्टडी से फरार करवाने के मामले में अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है। इसी जेल से उसे सीकर कोर्ट में पेश किया गया।

एडवोकेट रघुनाथराम सुला ने बताया कि सुभाष बानूड़ा को अदालत में मुजरिम बयान दर्ज कराने के लिए लाया गया। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की।

आगामी सुनवाई

पेशी के दौरान कोर्ट परिसर और आसपास कड़ी सुरक्षा बरती गई थी। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हाई अलर्ट जारी किया। कोर्ट में आरोपी की पेशी का मुख्य उद्देश्य उसका बयान दर्ज कराना और मामले की जांच में सहयोग प्राप्त करना था। 

सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने सभी प्रवेश मार्गों पर निगरानी रखी और आसपास की भीड़ को नियंत्रित किया। यह सुनिश्चित किया गया कि कोर्ट में पेशी सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

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