9 फरवरी 2026 का पंचांग: सीता जयंती और कालाष्टमी के साथ शुभ मुहूर्त

9 फरवरी 2026 को सीता जयंती और कालाष्टमी मनाई जाएगी। जानिए राहुकाल, वृद्धि योग, विशाखा नक्षत्र और शुभ मुहूर्त के समय।

9 फरवरी 2026 को सोमवार है, फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन सीता जयंती और कालाष्टमी मनाई जाएगी। राहुकाल, वृद्धि योग, विशाखा नक्षत्र और सूर्योदय-सूर्यास्त के समय विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

अष्टमी तिथि और वृद्धि योग

9 फरवरी 2026 को फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। यह तिथि सोमवार को पूरे दिन और रातभर रहेगी और मंगलवार सुबह तक जारी रहेगी। अष्टमी तिथि का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों में विशेष सफलता मिलती है।

वृद्धि योग भी इस दिन बन रहा है। यह योग रात 12:52 तक रहेगा। वृद्धि योग व्यक्ति के लिए आर्थिक लाभ, मानसिक शांति और अच्छे निर्णय लेने में मददगार माना जाता है। इस योग के दौरान किए गए धार्मिक कर्म और दान-पुण्य विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

विशाखा नक्षत्र और व्रत-त्योहार

9 फरवरी को पूरा दिन और रात विशाखा नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र मंगलवार सुबह तक जारी रहेगा और धार्मिक कर्मकांड के लिए शुभ माना जाता है। विशाखा नक्षत्र में किए गए उपाय, पूजा और ध्यान लाभकारी होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

9 फरवरी 2026 का पंचांग: सीता जयंती और कालाष्टमी के साथ शुभ मुहूर्त

इस दिन दो महत्वपूर्ण पर्व भी मनाए जाएंगे। पहला, सीता जयंती, जो माता सीता के जन्म और प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। दूसरा, कालाष्टमी, जो काली शक्ति और धर्म की रक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है। इन व्रतों और त्योहारों का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है।

राहुकाल और शुभ समय

इस दिन विभिन्न शहरों के लिए राहुकाल अलग-अलग रहेगा। उदाहरण के लिए, दिल्ली में राहुकाल सुबह 8:28 से 9:50 तक रहेगा। मुंबई में यह समय 8:36 से 10:02 बजे तक है। भोपाल में राहुकाल सुबह 8:21 से 9:46 तक रहेगा, जबकि कोलकाता में 7:37 से 9:02 तक। राहुकाल के दौरान कोई भी नया काम शुरू करना अशुभ माना जाता है।

शुभ मुहूर्त और ग्रह योगों का ध्यान रखते हुए कार्य करने से व्यक्ति को सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। इस दिन सुबह सूर्योदय 7:03 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 6:06 बजे। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय धार्मिक कर्मकांड के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

सीता जयंती का महत्व

सीता जयंती का दिन हर साल फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसे सीताष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन माता सीता की वंदना और पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

माता सीता की कृपा से व्यक्ति को अच्छे गुण, धार्मिक जीवन और दांपत्य जीवन में आनंद मिलता है। इसके अलावा इस दिन किए गए धार्मिक कर्म और दान-पुण्य व्यक्ति के जीवन के मार्ग को सरल और कल्याणकारी बनाते हैं।

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