राजस्थान के 960 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन घोटाले में ACB ने 10 आरोपियों के खिलाफ 16 हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की। जांच में फर्जी सर्टिफिकेट, टेंडर घोटाले और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का खुलासा हुआ है।
जयपुर: राजस्थान में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) योजना से जुड़े 960 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ 16,000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में पेश की है।
यह मामला न केवल राजस्थान प्रशासन बल्कि देश की सार्वजनिक खरीद प्रणाली, ठेका प्रक्रिया और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
लाल बंडलों में अदालत पहुंची चार्जशीट
सोमवार को जयपुर स्थित एसीबी कोर्ट में चार्जशीट पेश करने के लिए जांच एजेंसी के अधिकारी विशेष तैयारी के साथ पहुंचे।
चार वरिष्ठ अधिकारी जयपुर के झालाना स्थित मुख्यालय से दो टेंपो ट्रैवलर वाहनों में कुल 54 लाल बंडलों में दस्तावेज लेकर अदालत पहुंचे। इन बंडलों में 16,000 पन्नों की केस डायरी, तकनीकी रिपोर्ट, बैंकिंग रिकॉर्ड, फर्जी दस्तावेजों के नमूने, वित्तीय लेन-देन का ब्योरा और आरोपियों से जुड़े साक्ष्य शामिल थे।
इतनी बड़ी चार्जशीट इस मामले की गंभीरता और जांच के दायरे को दर्शाती है।
आरोप: फर्जी प्रमाण पत्र से हासिल किए करोड़ों के टेंडर
एसीबी की चार्जशीट के अनुसार, दो निजी कंपनियों—मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी—ने कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के जरिए जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडर हासिल किए।
जांच में सामने आया कि दोनों कंपनियों के संचालकों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम पर फर्जी कार्य अनुभव प्रमाण पत्र तैयार करवाए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की निविदाओं में पात्रता साबित करने के लिए किया गया। एसीबी का आरोप है कि यह पूरा काम विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ।

कैसे हुआ कथित घोटाला
जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2021 में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर टेंडर जारी किए गए थे। इसी दौरान:
- श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने 68 निविदाओं में हिस्सा लिया
- इनमें से 31 टेंडर एल-1 (सबसे कम बोलीदाता) के रूप में हासिल किए
- कुल लगभग 859.2 करोड़ रुपये के ठेके मिले
- वहीं श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में भाग लिया
- 73 टेंडर में सफल रही
लगभग 120.25 करोड़ रुपये के अनुबंध हासिल किए, जांच में आरोप है कि दोनों कंपनियों ने गलत दस्तावेजों के आधार पर योग्यता हासिल की और सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचाया।
फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करने का खुलासा
मामले में अहम मोड़ तब आया जब अहमदाबाद निवासी निजी कार्यालय सहायक मुकेश पाठक से पूछताछ हुई। एसीबी के मुताबिक, मुकेश पाठक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने इरकॉन इंटरनेशनल के नाम पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार करवाने में मदद की। जांच के अनुसार:
- फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए 15 लाख रुपये से अधिक की रकम ली गई
- यह दस्तावेज महेश मित्तल और पदमचंद जैन को दिए गए
- सरकारी विभागों से आने वाले सत्यापन ईमेल का जवाब भी फर्जी तरीके से भेजा गया
- इस खुलासे के बाद जांच को ठोस दिशा मिली।
किन अधिकारियों पर कार्रवाई
चार्जशीट में कई वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। आरोप है कि इन्होंने टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की और संदिग्ध फर्मों को लाभ पहुंचाया।
चार्जशीट में शामिल प्रमुख नाम:
- केडी गुप्ता (चीफ इंजीनियर)
- दिनेश गोयल (तत्कालीन मुख्य अभियंता)
- डीके गौड़ (सेवानिवृत्त तकनीकी चीफ इंजीनियर)
- नीरज/निरिल कुमार (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता)
- सुशील शर्मा (वित्तीय सलाहकार)
- शुभांशु दीक्षित (अतिरिक्त मुख्य अभियंता)
- अरुण श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता)
- महेंद्र प्रकाश सोनी (सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता)
- विशाल सक्सेना (तत्कालीन अधिशासी अभियंता)
- मुकेश पाठक
एसीबी का कहना है कि यह केवल शुरुआती चरण है और आगे और नाम सामने आ सकते हैं।
रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल पर शिकंजा
इस हाई-प्रोफाइल मामले में रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, उनके खिलाफ अभी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। सोमवार को पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें फिर एसीबी कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने दो दिन की अतिरिक्त रिमांड मंजूर की। उनकी ओर से पारिवारिक कारणों का हवाला देकर अंतरिम जमानत की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
फरार आरोपी और संपत्ति कुर्की
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मामले के तीन अहम आरोपी अब भी फरार हैं:
- जितेंद्र शर्मा (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर)
- मुकेश गोयल (सुपरिटेंडिंग इंजीनियर)
- संजीव गुप्ता (निजी व्यक्ति)
अदालत पहले ही इनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर चुकी है।
जांच की शुरुआत और छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी ने 17 फरवरी को राजस्थान, बिहार, झारखंड, दिल्ली और अन्य राज्यों में कुल 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूत जुटाए गए। बाद में ED ने भी अपनी समानांतर जांच में वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेज जुटाए और संबंधित जानकारी एसीबी को सौंपी।
कमीशन और भ्रष्टाचार के आरोप
जांच रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि टेंडर राशि का लगभग 4 प्रतिशत तक कथित कमीशन अग्रिम रूप से दिया गया। एसीबी और ईडी के दस्तावेजों के अनुसार, संदिग्ध ठेकेदारों ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावशाली लोगों तक कथित भुगतान किए। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।









