तृणमूल कांग्रेस नेता Abhishek Banerjee ने Election Commission of India पर पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR के दौरान नियमों और सुप्रीम कोर्ट निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने ERO की भूमिका कमजोर होने और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
West Bengal: अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया में वैधानिक प्रावधानों, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और अपने ही आदेशों का तिहरा उल्लंघन कर रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी ने कहा कि इस प्रक्रिया के जरिए सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारियों यानी AERO को मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाने की शक्ति मिल सकती है, जो कानून के खिलाफ है। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि ECINet पोर्टल पर चुनाव पंजीकरण अधिकारी यानी ERO सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के काम की सही निगरानी नहीं कर पा रहे हैं।
उनके मुताबिक यह स्थिति जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 13बी और 13सी के प्रावधानों के खिलाफ है। इन धाराओं में स्पष्ट है कि मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने की जिम्मेदारी ERO की होती है, जबकि AERO केवल उनकी सहायता करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला
बनर्जी ने कहा कि यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 9 फरवरी और 20 फरवरी के आदेशों के भी विपरीत है। इन आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने का अंतिम निर्णय ERO द्वारा ही लिया जाना चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा कि तार्किक विसंगति या अपरिभाषित श्रेणी के तहत आने वाले दावों का निपटारा अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में इस प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है।
आयोग के अपने आदेश पर भी सवाल
अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के 24 जून 2025 को जारी आदेश संख्या 23/2025-ERS का भी जिक्र किया। इस आदेश में कहा गया था कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का ERO यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पात्र नागरिक सूची से बाहर न रह जाए और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
बनर्जी का कहना है कि वर्तमान SIR प्रक्रिया इस आदेश की भावना के खिलाफ है। उन्होंने इसे तिहरा उल्लंघन बताते हुए कहा कि इससे AERO को मनमाने और गैरकानूनी तरीके से नाम हटाने का अवसर मिल सकता है।
West Bengal Voter List पर विवाद
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का पुनरीक्षण हमेशा राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है। SIR प्रक्रिया का उद्देश्य सूची को अपडेट करना, गलत प्रविष्टियों को हटाना और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना होता है। लेकिन इस बार विपक्षी दलों की ओर से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यदि नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी तरीके से नहीं होगी तो इससे हजारों पात्र नागरिकों का मतदान अधिकार प्रभावित हो सकता है।
लोकतांत्रिक अधिकार का सवाल
मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद होती है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से हट जाता है तो वह अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकता है। इसी वजह से बनर्जी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए आयोग से जवाब मांगा है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत हो और अंतिम अधिकार ERO के पास ही रहे। उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।










