बीते तीन वर्षों में एक्टिव इक्विटी फंड्स ने पैसिव फंड्स से बेहतर रिटर्न दिए। छोटे और मिडकैप फंड्स में पॉजिटिव अल्फा दिखा। पैसिव फंड्स लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव वाले समय में एक्टिव फंड्स निवेशकों के लिए लाभकारी।
Funds: धीमी आर्थिक वृद्धि और भू-राजनीतिक तनाव के बीच बीते तीन वर्षों में एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिला है। वैल्यू रिसर्च (Value Research) के डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रमुख कैटेगरीज में एक्टिव फंड्स ने अपने संबंधित बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में रिस्क-एडजस्टेड आधार पर अच्छा प्रदर्शन किया है। इसका मतलब है कि निवेशकों को जोखिम के बावजूद बेहतर रिटर्न हासिल हुआ।
एक्टिव फंड्स में फंड मैनेजर की भूमिका अहम होती है। वे बाजार की परिस्थिति और स्टॉक्स के वैल्यूएशन के आधार पर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकते हैं। यही वजह है कि उतार-चढ़ाव वाले समय में एक्टिव फंड्स पैसिव फंड्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
एक्टिव स्कीम्स ने दिया पॉजिटिव अल्फा
पॉजिटिव अल्फा का मतलब है कि कोई स्कीम जोखिम को एडजस्ट करने के बाद अपने बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न देती है। बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, लार्जकैप, मिडकैप, स्मॉलकैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स में 60 से 80 फीसदी स्कीम्स में पॉजिटिव अल्फा देखा गया।
विशेषकर एक्टिव स्मॉलकैप स्कीम्स में मीडियन अल्फा 2 फीसदी से अधिक रहा। अन्य कैटेगरी में मीडियन आधार पर 0.8 फीसदी से 1.3 फीसदी के बीच अल्फा देखने को मिला। यह संकेत देता है कि सही स्टॉक्स चुनकर निवेश करने पर एक्टिव फंड्स निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे सकते हैं।
पैसिव फंड्स का बढ़ता ट्रेंड
पैसिव फंड्स भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये फंड किसी खास इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और स्टॉक्स चुनने की कोशिश नहीं करते। ट्रांसेंड कैपिटल के डायरेक्टर कार्तिक झावेरी के अनुसार, कई बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली स्कीम्स ने अब नेचर में पैसिव रणनीति अपनाई है।
पैसिव फंड्स कुछ खास मार्केट साइकिल में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, बड़ी पब्लिक सेक्टर कंपनियों या किसी लोकप्रिय इंडेक्स का इक्वल-वेटेड वर्जन ट्रैक करने वाली स्कीम्स। हालांकि, भविष्य में कौन-सी थीम या सेगमेंट बेहतर प्रदर्शन करेगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल होता है।
उतार-चढ़ाव में एक्टिव फंड्स का फायदा
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले समय में एक्टिव फंड मैनेजर्स का महत्व बढ़ जाता है। पैसिव फंड्स की तरह इन्हें इंडेक्स के समान स्टॉक्स खरीदने की बाध्यता नहीं होती। यह लचीलापन उन्हें आकर्षक वैल्यूएशन वाले स्टॉक्स में निवेश करने और बाजार की स्थिति बदलने पर बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर देता है।
यदि निवेशक किसी सेक्टर या थीम के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं, तो वे उस पर दांव लगाने के लिए पैसिव स्कीम्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन सामान्य परिस्थितियों में सक्रिय प्रबंधन से निवेशकों को बेहतर अल्फा मिलने की संभावना अधिक रहती है।
पैसिव फंड्स की लोकप्रियता बढ़ेगी
फाइनैंशियल प्लानर जयंत विद्वान्स के अनुसार, निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक्टिव और पैसिव दोनों प्रकार के फंड्स का महत्व है। जैसे-जैसे बाजार परिपक्व होगा और स्कीम्स के लिए इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल होगा, पैसिव फंड्स की लोकप्रियता बढ़ सकती है।
पैसिव फंड्स कम लागत पर बाजार के प्रदर्शन को ट्रैक करते हैं और लंबे समय में स्थिर रिटर्न देने में सक्षम होते हैं। इसलिए नए निवेशक और लार्ज कैपिटल वाले निवेशक इनकी ओर रुख कर सकते हैं।
सर्वाइवरशिप बायस का असर
लैडर7 फाइनेंशियल एडवाइजरीज के फाउंडर सुरेश सदागोपन के अनुसार, आउटपरफॉर्म करने वाले फंड्स के आंकड़ों में सर्वाइवरशिप बायस का असर होता है। खराब प्रदर्शन करने वाली स्कीम्स को बंद कर दिया जाता है या अन्य स्कीम्स में मर्ज कर दिया जाता है, जिससे आंकड़ों पर प्रभाव पड़ता है।
सदागोपन के अनुसार, लार्जकैप स्कीम्स अपने बेंचमार्क के मुकाबले अंडरपरफॉर्म करने के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील रहती हैं। इस कारण निवेशक पैसिव विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। वहीं, स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स में अभी बेहतर प्रदर्शन के अवसर हैं।
छोटी कंपनियों में अल्फा के मौके
छोटी कंपनियों में निवेश करने वाले फंड्स के पास ज्यादा अल्फा उत्पन्न करने का अवसर होता है। बड़ी कंपनियों को कवर करने वाले विश्लेषकों की संख्या अधिक होती है, जिससे उनके शेयर की कीमतें वास्तविक मूल्य के करीब रहती हैं।
लेकिन छोटी कंपनियों को ट्रैक करने वाले निवेशक कम होते हैं। इसका मतलब है कि फंड मैनेजर ऐसे स्टॉक्स की पहचान कर सकते हैं, जिन्हें बाजार पूरी तरह समझ नहीं पाया है। इस तरह वे बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और निवेशकों को अल्फा प्रदान कर सकते हैं।









