Aishwarya Lekshmi: ड्रेस विवाद पर भड़कीं ऐश्वर्या लक्ष्मी, बोलीं- क्या महिला की नेकलाइन ही देश की सबसे बड़ी समस्या है?

Aishwarya Lekshmi ने ड्रेस विवाद पर ट्रोलर्स को जवाब दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिला की नेकलाइन और कपड़े ही संस्कृति का पैमाना हैं? जानें ऐश्वर्या ने

मलयालम फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री ऐश्वर्या लक्ष्मी बीते मई में एक डायमंड ज्वेलरी एग्जिबिशन में पहुंची थीं, जहां उनके आउटफिट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री ऐश्वर्या लक्ष्मी ने कई महीने पुरानी ड्रेस को लेकर हुई ऑनलाइन आलोचना पर अब खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक ज्वेलरी इवेंट में पहने गए उनके आउटफिट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी। अब एक ताजा इंटरव्यू में अभिनेत्री ने उस पूरे विवाद पर अपनी बात रखते हुए महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर सवाल उठाए हैं।

ऐश्वर्या लक्ष्मी का कहना है कि किसी महिला के कपड़े या उसके शरीर के किसी हिस्से को चर्चा का केंद्र बनाने के बजाय समाज को कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए। अभिनेत्री ने यह भी सवाल किया कि क्या किसी महिला की नेकलाइन वास्तव में किसी देश की सबसे बड़ी समस्या हो सकती है।

ज्वेलरी इवेंट में पहनी थी की-होल नेकलाइन वाली ड्रेस

ऐश्वर्या लक्ष्मी ने बताया कि वह एक डायमंड ज्वेलरी प्रदर्शनी में शामिल हुई थीं। इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने ऐसी ड्रेस चुनी थी, जिसमें की-होल नेकलाइन थी। उनके मुताबिक, ड्रेस को लेकर उन्हें खुद कोई परेशानी नहीं थी और उनके दोस्तों को भी उनका यह लुक काफी पसंद आया था। अभिनेत्री ने बताया कि ड्रेस पहनने से पहले उन्हें अंदाजा नहीं था कि की-होल डिजाइन कितना बड़ा दिखाई देगा। हालांकि, तैयार होने के बाद उन्हें अपना लुक अच्छा लगा। उन्होंने ज्वेलरी के साथ इस आउटफिट को एक अलग और आकर्षक अंदाज बताया।

विवाद की वजह ड्रेस से ज्यादा वहां मौजूद कैमरों का तरीका बना। ऐश्वर्या के अनुसार, उन्हें महसूस हुआ कि कई फोटोग्राफर उनके चेहरे के बजाय शरीर के कुछ हिस्सों पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे।

'मुझे लगा मेरी पर्सनल बाउंड्री का उल्लंघन हुआ'

अभिनेत्री ने इंटरव्यू में कहा कि इवेंट के दौरान फोटोग्राफरों का रवैया उन्हें असहज कर रहा था। उनका मानना है कि जब किसी व्यक्ति को लगातार असहज स्थिति में रखा जाता है तो उसकी बॉडी लैंग्वेज भी स्वाभाविक रूप से बदल जाती है। ऐश्वर्या ने बताया कि इसी वजह से उन्होंने अपने हाथों को अपनी छाती के सामने क्रॉस कर लिया था। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत सीमा यानी पर्सनल बाउंड्री से जुड़ा मामला बताया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका ऐसा करना ड्रेस को लेकर शर्मिंदगी या पछतावे का संकेत नहीं था। बल्कि वह कैमरों के एंगल और लोगों की निगाहों के कारण असहज हुई थीं।

संस्कृति को कपड़ों से जोड़ने पर उठाया सवाल

ऐश्वर्या लक्ष्मी ने महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली सोशल मीडिया बहस पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि किसी समाज की संस्कृति केवल कपड़ों की लंबाई या नेकलाइन की गहराई से तय नहीं होती। उनके मुताबिक, संस्कृति का असली परिचय लोगों के व्यवहार और उनके आचरण से मिलता है।अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उन्हें ऑनलाइन की गई टिप्पणियों से व्यक्तिगत रूप से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन इस मामले में वह यह बताना चाहती थीं कि वास्तव में उनके साथ क्या हुआ था। उन्होंने साफ किया कि उनकी प्रतिक्रिया किसी तरह का बचाव या सफाई पेश करने के लिए नहीं है।

'2026 में भी क्या हम इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे?'

ऐश्वर्या ने सोशल मीडिया पर महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली चर्चाओं की प्राथमिकता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज के सामने आर्थिक विकास, GDP, बच्चों के खिलाफ हिंसा और अकेले रह रहे बुजुर्गों जैसी कई गंभीर चुनौतियां हैं। अभिनेत्री ने सवाल किया कि देश की आर्थिक प्रगति और GDP जैसे विषयों पर उतनी चर्चा क्यों नहीं होती, जितनी किसी महिला के कपड़ों पर होती है। उन्होंने बुजुर्ग माता-पिता की स्थिति और बच्चों के साथ होने वाले अत्याचारों को भी महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा बताया।

उनका कहना था कि जब समाज के सामने इतने गंभीर विषय मौजूद हैं, तब किसी महिला ने क्या पहना है और उसकी नेकलाइन कितनी गहरी है, इस पर इतनी ऊर्जा खर्च करना सवाल खड़ा करता है।

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