आयुष्मान खुराना बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय, बेहतरीन कंटेंट और मेहनत के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज वह अपना 42वां जन्मदिन मना रहे हैं।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: बॉलीवुड अभिनेता, गायक और टीवी होस्ट आयुष्मान खुराना आज अपना 42वां जन्मदिन मना रहे हैं। 14 सितंबर 1984 को चंडीगढ़ में जन्मे आयुष्मान ने मनोरंजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए लंबा संघर्ष किया। उनकी कहानी उन कलाकारों के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहर से निकलकर बड़े सपने देखते हैं। कभी कॉलेज फेस्ट और ट्रेन के डिब्बों में गाना गाकर कमाई करने वाले आयुष्मान ने आगे चलकर फिल्मों में ऐसा मुकाम हासिल किया कि उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
निशांत से आयुष्मान खुराना बनने की कहानी
आयुष्मान खुराना का जन्म एक पंजाबी-हिंदू परिवार में हुआ था। जन्म के समय उनका नाम निशांत खुराना रखा गया था। जब वह करीब तीन साल के थे, तब उनके माता-पिता पूनम और पी. खुराना ने ज्योतिषीय सलाह के बाद उनका नाम बदलकर आयुष्मान रख दिया। उनके पिता ज्योतिष के क्षेत्र से जुड़े थे। चंडीगढ़ में पले-बढ़े आयुष्मान की शुरुआती शिक्षा भी वहीं हुई।
बचपन से ही उन्हें संगीत, कविता और अभिनय में रुचि थी। कॉलेज पहुंचने के बाद उनकी यह दिलचस्पी और मजबूत हो गई। उन्होंने डीएवी कॉलेज के थिएटर ग्रुप के साथ जुड़कर कई नाटकों में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की।
थिएटर से शुरू हुआ सफर
कॉलेज के दिनों में आयुष्मान ने सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि मंच पर अपनी प्रतिभा को भी निखारा। उन्होंने अलग-अलग कॉलेजों के कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। BITS Pilani, St. Bede's College Shimla और IIT Bombay जैसे संस्थानों के मंचों पर भी उनकी प्रतिभा को पहचान मिली।यही अनुभव आगे चलकर उनके करियर की नींव बने। हालांकि बॉलीवुड में प्रवेश करना उनके लिए आसान नहीं था।
मुंबई आने के बाद शुरुआती दिनों में उन्हें आर्थिक और रहने से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उस दौर में वह एक ऐसे दोस्त के घर पर रहे, जो मुंबई में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था।
ट्रेन में गाना गाकर कमाए पैसे
मुंबई में संघर्ष के दौरान आयुष्मान ने अपनी प्रतिभा को कमाई का जरिया बनाया। उन्होंने कॉलेज फेस्ट, शादियों और दूसरे कार्यक्रमों में गाने के साथ-साथ ट्रेन के डिब्बों में भी दोस्तों के साथ परफॉर्म किया। इससे उन्हें थोड़ी-बहुत कमाई होती थी और मुंबई में अपने सपनों को जिंदा रखने में मदद मिलती थी। आयुष्मान ने कई मौकों पर अपने संघर्ष के इस दौर का जिक्र किया है। उनके लिए यह अनुभव सिर्फ आर्थिक जरूरत पूरी करने का माध्यम नहीं था, बल्कि लोगों के सामने अपनी कला पेश करने का एक बड़ा अवसर भी था।

MTV Roadies से मिली पहली बड़ी पहचान
फिल्मों में आने से पहले आयुष्मान ने टेलीविजन की दुनिया में अपनी जगह बनाई। उन्होंने MTV Roadies के दूसरे सीजन में हिस्सा लिया और विजेता बने। इसके बाद उन्होंने रेडियो जॉकी के रूप में भी काम किया। उनकी होस्टिंग स्किल्स ने भी उन्हें लोकप्रिय बनाया। उन्होंने 'इंडियाज गॉट टैलेंट', 'जस्ट डांस' और 'MTV Rock On' जैसे कार्यक्रमों की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने टीवी अभिनय में भी हाथ आजमाया। इन अनुभवों ने कैमरे के सामने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और बॉलीवुड के लिए रास्ता तैयार किया।
'विक्की डोनर' से बदली जिंदगी
साल 2012 में आयुष्मान खुराना ने फिल्म 'विक्की डोनर' से बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म में उनके साथ यामी गौतम नजर आई थीं। अलग विषय और नए अंदाज की इस फिल्म ने दर्शकों का ध्यान खींचा और आयुष्मान रातों-रात चर्चा में आ गए। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक भूमिकाओं के बजाय अलग और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी कहानियों वाली फिल्मों को प्राथमिकता दी। 'दम लगा के हईशा', 'बरेली की बर्फी', 'शुभ मंगल सावधान' और 'बधाई हो' जैसी फिल्मों ने उनकी अलग पहचान बनाई।
साल 2018 में रिलीज हुई 'अंधाधुन' में उनके अभिनय को भी खूब सराहा गया। इस फिल्म के लिए आयुष्मान को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस उपलब्धि ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की कतार में मजबूती से स्थापित कर दिया।
एक्टिंग के साथ गायकी में भी बनाई पहचान
आयुष्मान खुराना की प्रतिभा केवल अभिनय तक सीमित नहीं है। वह एक लोकप्रिय गायक भी हैं और अपनी कई फिल्मों में खुद गाने गा चुके हैं। 'पानी दा रंग', 'सड्डी गली आजा' और 'नज्म-नज्म' जैसे गानों को दर्शकों से खासा प्यार मिला। उनकी आवाज और संगीत के प्रति लगाव ने उनकी पहचान को अभिनेता से आगे बढ़ाकर एक बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया।











