अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नया सवाल खड़ा हो गया है। राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार पर सियासी निगाहें टिकी हैं। समाज सेवा से संसद तक उनका सफर अब चर्चा में है।
Maharashtra: बारामती में लैंडिंग के दौरान हुए दर्दनाक विमान हादसे ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन की खबर सामने आते ही राज्य की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार सुबह करीब 8:45 बजे निजी विमान में आई तकनीकी खराबी के बाद हुए इस क्रैश में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई।
अजित पवार के अचानक चले जाने से न केवल राजनीतिक गलियारों में खालीपन महसूस किया जा रहा है, बल्कि पवार परिवार के निजी जीवन को लेकर भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ गई है। खास तौर पर उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग जानना चाहते हैं कि सुनेत्रा पवार कौन हैं, उनका अब तक का सफर कैसा रहा है और आगे उनकी भूमिका क्या हो सकती है।
सुनेत्रा पवार का शुरुआती जीवन
सुनेत्रा अजीत पवार का जन्म 18 अक्टूबर 1963 को हुआ था। वह महाराष्ट्र के प्रभावशाली पवार राजनीतिक परिवार का हिस्सा हैं। वर्ष 1985 में उनका विवाह अजित पवार से हुआ और इसके बाद करीब चार दशक तक उन्होंने राजनीति के केंद्र में रहते हुए भी एक संतुलित और सशक्त भूमिका निभाई।
लंबे समय तक सुनेत्रा पवार ने खुद को केवल एक राजनेता की पत्नी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई।
शिक्षा ने दी मजबूत नींव
सुनेत्रा पवार शैक्षणिक रूप से भी मजबूत रही हैं। उन्होंने अप्रैल 1983 में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से, एस.बी. आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज, औरंगाबाद से बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) की डिग्री हासिल की। उनकी शिक्षा और समझ ने आगे चलकर उनके सामाजिक और सार्वजनिक कार्यों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
राजनीति से पहले समाज सेवा
राजनीति में आने से पहले सुनेत्रा पवार ने लंबे समय तक समाज सेवा के क्षेत्र में काम किया। वर्ष 2010 में उन्होंने Environmental Forum of India (EFOI) की स्थापना की। यह संगठन पर्यावरण संरक्षण, ऑर्गेनिक खेती, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर काम करता है।

EFOI के जरिए सुनेत्रा पवार ने किसानों, ग्रामीण समुदायों और पर्यावरण से जुड़े अभियानों को मजबूती दी। उनका मानना रहा है कि विकास तभी टिकाऊ हो सकता है जब पर्यावरण और ग्रामीण समाज को साथ लेकर चला जाए।
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
सुनेत्रा पवार का योगदान शिक्षा के क्षेत्र में भी रहा है। वह विद्या प्रतिष्ठान जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों की ट्रस्टी रही हैं। यह संस्थान खास तौर पर ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए जाना जाता है।
उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहा कि शिक्षा केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और कस्बों तक भी पहुंचे।
चुनावी राजनीति में कदम
लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखने के बाद सुनेत्रा पवार ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने NCP उम्मीदवार के रूप में बारामती सीट से चुनाव लड़ा। यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि उनके सामने शरद पवार की बेटी और उनकी ननद सुप्रिया सुले थीं।
ननद और भाभी की इस हाई प्रोफाइल राजनीतिक टक्कर ने पूरे महाराष्ट्र का ध्यान खींचा। हालांकि इस चुनाव में सुनेत्रा पवार को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उनकी राजनीतिक उपस्थिति और स्वीकार्यता को नजरअंदाज नहीं किया जा सका।
राज्यसभा तक का सफर
लोकसभा चुनाव के बाद भी सुनेत्रा पवार राजनीति के केंद्र में बनी रहीं। जून 2024 में उन्हें NCP की ओर से महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद बनाया गया। यह सीट प्रफुल्ल पटेल के खाली करने के बाद उन्हें निर्विरोध मिली।
राज्यसभा पहुंचने के साथ ही सुनेत्रा पवार ने संसदीय राजनीति में औपचारिक रूप से अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। यह उनके राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया।
पारिवारिक जीवन
सुनेत्रा और अजित पवार के दो बेटे हैं, पार्थ पवार और जय पवार। दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। सुनेत्रा पवार को हमेशा एक ऐसी महिला के रूप में देखा गया है, जिन्होंने परिवार और सार्वजनिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखा।
सार्वजनिक जीवन में रहते हुए सुनेत्रा पवार का नाम विवादों से भी जुड़ा। महाराष्ट्र स्टेट को ऑपरेटिव बैंक से जुड़े एक मामले में उन पर आरोप लगे थे। हालांकि बाद में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी।
इस घटना के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में और भी संयमित और संतुलित भूमिका निभाई।











