अजमेर दरगाह की बड़ी देग में एक युवक कूद गया और उसमें पड़े रुपए उठाने लगा। मौके पर मौजूद खादिम ने उसे बाहर निकाला। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर चेतावनी देकर छोड़ दिया, मामला वायरल हो गया।
अजमेर: राजस्थान के अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती दरगाह परिसर में शनिवार दोपहर एक अजीबोगरीब और संवेदनशील घटना सामने आई। दरगाह की ऐतिहासिक “बड़ी देग” में एक युवक अचानक कूद गया और वहां मौजूद सामग्री से नकदी उठाने लगा। इस घटना ने मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं और कर्मचारियों में हड़कंप मचा दिया।
घटना दोपहर करीब 3 बजे की बताई जा रही है, जब परिसर में सामान्य गतिविधियां चल रही थीं।
बड़ी देग में कूदकर रुपये उठाने लगा युवक
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक अचानक बड़ी देग के पास पहुंचा और बिना किसी चेतावनी के उसमें छलांग लगा दी। देग में सूखे चावल, मेवे, दूध, शक्कर और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी मौजूद थी।
अंदर पहुंचते ही युवक ने वहां पड़ी नकदी उठानी शुरू कर दी और उसे अपनी जेब में रखने लगा। यह देखकर आसपास मौजूद लोग हैरान रह गए।
खादिम ने दिखाई तत्परता, युवक को सुरक्षित बाहर निकाला
स्थिति बिगड़ती देख दरगाह कमेटी के एक खादिम (सेवक) ने तुरंत कार्रवाई की। वह स्वयं देग में कूदे और कड़ी मशक्कत के बाद युवक को नियंत्रित किया।

काफी प्रयासों के बाद युवक को सुरक्षित बाहर निकाला गया और स्थिति को काबू में किया गया। यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं होता, तो घटना और गंभीर रूप ले सकती थी।
पुलिस मौके पर पहुंची, युवक मानसिक रूप से कमजोर पाया गया
घटना की जानकारी मिलते ही दरगाह थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि युवक मानसिक रूप से कमजोर (विमंदित) है।
पुलिस और दरगाह प्रशासन ने स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभाला और युवक को किसी तरह की कानूनी कार्रवाई के बजाय केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी घटना
दरगाह परिसर में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना में किसी प्रकार की धार्मिक या आपराधिक मंशा नहीं थी और युवक की मानसिक स्थिति अस्थिर थी।
अजमेर दरगाह और बड़ी देग का ऐतिहासिक महत्व
अजमेर की यह दरगाह न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में सूफी परंपरा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जानी जाती है। यहां स्थित “बड़ी देग” का भी ऐतिहासिक महत्व है।
इतिहास के अनुसार, यह विशाल देग मुगल बादशाह अकबर द्वारा चित्तौड़गढ़ विजय के बाद दरगाह को भेंट स्वरूप दी गई थी। अकबर स्वयं पैदल यात्रा कर दरगाह पहुंचे थे और उन्होंने ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की मजार पर अकीदत पेश की थी।
बड़ी देग की विशेषताएं और लंगर परंपरा
यह देग भारत की सबसे बड़ी देगों में से एक मानी जाती है, जिसमें एक बार में लगभग 80 मन (करीब 3200 किलोग्राम) लंगर तैयार किया जा सकता है।
इसमें चावल, दूध, मेवे और शक्कर से बने विशेष लंगर को तैयार किया जाता है, जिसे श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। परंपरा के अनुसार, इस देग में कभी भी मांसाहारी भोजन नहीं पकाया जाता।
उर्स जैसे विशेष अवसरों पर इस देग में बड़े पैमाने पर लंगर तैयार किया जाता है, जबकि सामान्य दिनों में छोटी देग का उपयोग किया जाता है।
सुरक्षा और प्रबंधन पर उठे सवाल
हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की गंभीर क्षति नहीं हुई, लेकिन इसने दरगाह परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को और मजबूत करने की आवश्यकता है।










