अमेरिका के टेक्सास शहर के फूड स्टोर में आग लगने से हरियाणा के 22 वर्षीय युवक और पंजाब के स्टोर मालिक की जिंदा जलकर मौत हो गई। युवक ने 50 लाख खर्च कर डंकी रूट से अमेरिका पहुंचकर नौकरी शुरू की थी।
टेक्सास: अमेरिका के टेक्सास राज्य में एक फूड स्टोर में लगी भीषण आग ने दो भारतीयों की जान ले ली। इस हादसे में हरियाणा के करनाल निवासी 22 वर्षीय सुखविंद्र सिंह और पंजाब के मोहाली निवासी स्टोर मालिक विक्रांत की मौके पर ही मौत हो गई।
यह घटना उस समय हुई जब दोनों स्टोर के अंदर सो रहे थे और आग अचानक तेजी से फैल गई, जिससे उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।
आग इतनी तेज थी कि बचने का मौका नहीं मिला
स्थानीय पुलिस के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी इमारत कुछ ही मिनटों में चपेट में आ गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
आग बुझने के बाद दोनों के शव स्टोर के अंदर से बरामद किए गए। पूरी इमारत और अंदर रखा सामान भी जलकर खाक हो गया।
पीड़ितों की पहचान और पृष्ठभूमि
मृतकों में एक की पहचान हरियाणा के करनाल जिले के गंगाटेहड़ी गांव निवासी सुखविंद्र सिंह के रूप में हुई है। सुखविंद्र अपने परिवार का इकलौता बेटा था।
वह लगभग चार साल पहले अवैध रूप से बताए जाने वाले “डंकी रूट” के जरिए अमेरिका पहुंचा था। परिवार ने उसे विदेश भेजने के लिए करीब 50 लाख रुपये खर्च किए थे। वह टेक्सास में एक फूड स्टोर में काम करता था।
दूसरे मृतक Vikrant Mohali पंजाब के मोहाली निवासी थे, जो उसी स्टोर के मालिक थे। बताया जा रहा है कि वह अमेरिका में स्थायी निवासी (PR) थे और कारोबार संभालते थे।

हादसे के समय क्या हुआ था?
जानकारी के अनुसार, घटना वाली रात सुखविंद्र और विक्रांत दोनों काम खत्म करने के बाद स्टोर में ही सो रहे थे। उसी दौरान अचानक आग लग गई।
तीसरा कर्मचारी उस दिन स्टोर में मौजूद नहीं था। आग लगने की सूचना मिलते ही वह वापस लौटा और बाद में उसने ही परिवार को इस हादसे की जानकारी दी।
बचने की कोशिश लेकिन नाकाम रहे दोनों
स्थानीय लोगों और साथियों के अनुसार, आग लगने के बाद दोनों ने बचने की पूरी कोशिश की। उन्होंने स्टोर से बाहर निकलने का प्रयास किया और कथित तौर पर बाथरूम में शरण लेने की कोशिश भी की, लेकिन आग वहां तक भी पहुंच गई।
फायर टीम को बाद में दोनों के शव बाथरूम के अंदर मिले। विक्रांत के शव की पहचान उनके भाई ने की, जबकि सुखविंद्र का शरीर बुरी तरह जल जाने के कारण पहचान डीएनए टेस्ट से ही संभव हो पाएगी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सुखविंद्र की मौत की खबर मिलते ही उसके गांव गंगाटेहड़ी में शोक की लहर दौड़ गई। वह अपने परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है।
पिता शीशपाल, जो खेती करते हैं, ने बताया कि उन्होंने बेटे को विदेश भेजने के लिए अपनी जमीन तक बेच दी थी। उन्होंने कई बार उसे विदेश न जाने की सलाह दी थी, लेकिन वह बेहतर भविष्य की उम्मीद में अमेरिका गया था।
शव वापस लाने की कोशिश जारी
परिवार और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, दोनों शवों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें 8 से 10 दिन का समय लग सकता है।
समाजसेवी Ranbir Lohan ने बताया कि अमेरिका में स्थानीय संपर्कों के साथ मिलकर शवों को भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि प्रक्रिया में देरी होती है, तो अंतिम संस्कार अमेरिका में ही किया जाएगा।
अवैध प्रवास और “डंकी रूट” पर फिर सवाल
यह घटना एक बार फिर अवैध प्रवास (डंकी रूट) के खतरों को उजागर करती है, जिसके जरिए कई युवा बेहतर भविष्य की तलाश में जोखिम भरा सफर करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना वैध दस्तावेजों के विदेश जाना न केवल कानूनी जोखिम पैदा करता है, बल्कि जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।









