जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने AAP विधायक मेहराज मलिक की PSA हिरासत रद्द कर दी है। उन्हें सितंबर 2025 से हिरासत में रखा गया था। कोर्ट के फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है और रिहाई की उम्मीद है।
Srinagar: AAP विधायक मेहराज मलिक हिरासत मामला में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत उनकी हिरासत को रद्द कर दिया है। विधायक को सितंबर 2025 से एहतियाती हिरासत में रखा गया था। अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया, जिससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी आवश्यकता न हो।
J&K लद्दाख हाई कोर्ट का फैसला: AAP विधायक मेहराज मलिक को बड़ी राहत
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के विधायक मेहराज मलिक को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत दी गई हिरासत को रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ ही लंबे समय से जेल में बंद विधायक को बड़ी कानूनी राहत मिली है। यह मामला पिछले कई महीनों से न्यायिक समीक्षा में था और लगातार सुनवाई चल रही थी।
कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद हिरासत आदेश को निरस्त करने का निर्णय सुनाया। विधायक की ओर से पेश वकील अप्पू सिंह ने बताया कि विस्तृत आदेश का इंतजार है, लेकिन अदालत का फैसला खुली सुनवाई में घोषित किया गया है। फैसले के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
हिरासत का कारण और कानूनी प्रक्रिया

मेहराज मलिक, जो डोडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और AAP की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख भी हैं, को 8 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। उन पर “सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों” में शामिल होने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद उन्हें कठुआ जिला जेल में भेज दिया गया था।
इस मामले में याचिका पर कई तारीखों पर सुनवाई हुई और 23 फरवरी को अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब हाई कोर्ट ने हिरासत आदेश को रद्द करते हुए मामले में महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की स्थिति
कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से इस निर्णय का स्वागत किया गया है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि लंबे समय तक हिरासत में रखना अनुचित था। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक अन्याय करार दिया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी फैसले को सही ठहराते हुए इसे “सत्यमेव जयते” बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाइयों पर सवाल खड़ा करता है। अब हिरासत आदेश रद्द होने के बाद कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने पर मलिक की रिहाई की उम्मीद जताई जा रही है।








