भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर सकता है। मार्च तक अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी है। इससे टेक्सटाइल और अन्य निर्यात क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
Trump Tariff: भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता के बीच बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका इस सप्ताह भारत के कई निर्यात उत्पादों पर लगाए गए मौजूदा 25 प्रतिशत आयात शुल्क यानी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर सकता है। अगर इस प्रक्रिया में किसी तरह की देरी होती है तो भारतीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह वॉशिंगटन दौरे के दौरान इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाएगा।
यह कदम दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में अहम माना जा रहा है। हाल ही में जारी संयुक्त बयान के बाद अब बातचीत कानूनी समझौते के अंतिम रूप तक पहुंचने की ओर बढ़ रही है।
वाणिज्य सचिव ने क्या कहा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क पहले ही हटा दिया गया है। अब शेष 25 प्रतिशत शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया जारी है और उम्मीद है कि यह काम इसी सप्ताह पूरा हो जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारण से इसमें देरी होती है तो वॉशिंगटन जाने वाली भारतीय टीम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेगी। टीम यह समझने की कोशिश करेगी कि टैरिफ में कटौती को लागू करने में देरी क्यों हो रही है।
वॉशिंगटन दौरे में कानूनी समझौते पर चर्चा
मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में भारतीय अधिकारियों की एक टीम इस सप्ताह के अंत में वॉशिंगटन रवाना होगी। वहां दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी।
फिलहाल दोनों देश वर्चुअल माध्यम से कानूनी दस्तावेजों पर काम कर रहे हैं। आमने सामने की बातचीत अगले सप्ताह तक जारी रहने की संभावना है। लक्ष्य यह है कि मार्च महीने तक इस कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकें। हालांकि अधिकारियों ने माना है कि कानूनी प्रक्रिया जटिल होती है, इसलिए किसी सख्त समयसीमा की घोषणा नहीं की गई है।
7 फरवरी का संयुक्त बयान क्यों अहम

भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को एक अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर संयुक्त बयान जारी किया था। इस बयान में समझौते की रूपरेखा तय की गई थी। पहले चरण में अमेरिका ने भारत द्वारा रूस से तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता को स्वीकार करते हुए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटाया था।
अब अगला कदम शेष टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करना है। यह कटौती लागू होने पर भारत के निर्यातकों को राहत मिलेगी और अमेरिका के बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
कपास और टेक्सटाइल सेक्टर को मिल सकती है राहत
वाणिज्य सचिव ने बताया कि भारत जिस तरह की कपास अमेरिका से आयात करता है, उसी को प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत तरजीही बाजार पहुंच मिलेगी। भारत मुख्य रूप से बेहद लंबे रेशे वाली कपास आयात करता है। इसके अलावा सामान्य कपास का भी आयात होता है।
अमेरिका का मुख्य उत्पादन सामान्य कपास है, इसलिए दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में संतुलन बनाना जरूरी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल ही में कहा था कि अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारत को सूत और कपास से बने परिधानों पर रियायती शुल्क का लाभ मिल सकता है।
अगर ऐसा होता है तो भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यातकों के लिए यह बड़ा अवसर साबित होगा। यह व्यवस्था कुछ हद तक बांग्लादेश को मिले लाभ जैसी हो सकती है, जिससे भारतीय उद्योग को प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
डिजिटल व्यापार फिलहाल समझौते से बाहर
वाणिज्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया है कि अंतरिम व्यापार समझौते में डिजिटल व्यापार से जुड़ा कोई अध्याय शामिल नहीं है। डिजिटल व्यापार नियमों पर अलग से बातचीत की जाएगी। यह विषय व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का हिस्सा होगा, जिसे बीटीए कहा जा रहा है। इस व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने में अभी समय लगेगा।
व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में संशोधन
पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस की ओर से जारी फैक्ट शीट में कहा गया था कि भारत ई कॉमर्स से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर सीमा शुल्क न लगाने से संबंधित नियमों पर बातचीत करेगा और डिजिटल सेवा कर समाप्त करेगा।
हालांकि एक दिन बाद इस फैक्ट शीट में संशोधन किया गया। नए संस्करण में संयुक्त बयान के अनुरूप बदलाव किए गए। इसमें कहा गया कि भारत प्राथमिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर शुल्क बाधाओं को दूर करेगा। साथ ही अमेरिका और भारत ऐसे मूल स्रोत के नियम पर बातचीत करेंगे ताकि सहमति वाले लाभ मुख्य रूप से दोनों देशों को ही मिलें।








