पटना समेत बिहार के कई जिलों में मैट्रिक परीक्षा के दौरान अलग-अलग घटनाएं सामने आईं, जिससे पहले ही दिन परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। पांच जिलों में कुछ परीक्षार्थियों ने निर्धारित समय के बाद केंद्र में प्रवेश पाने के लिए दीवार फांदने की कोशिश की। वहीं दरभंगा और मुजफ्फरपुर में सख्त जांच प्रक्रिया के दौरान पहचान सत्यापन को लेकर विवाद की स्थिति बनी। इसी बीच युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी द्वारा CBSE की 10वीं बोर्ड परीक्षा छोड़ने की खबर ने शिक्षा और खेल जगत में नई बहस छेड़ दी है।
सुबह से ही कई परीक्षा केंद्रों के बाहर परीक्षार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। निर्धारित समय से कुछ मिनट की देरी से पहुंचे छात्रों को जब प्रवेश नहीं दिया गया तो कुछ स्थानों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ छात्रों ने पीछे की दीवार से अंदर घुसने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस और केंद्र प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित किया और ऐसे छात्रों को नियमों की जानकारी देते हुए वापस भेज दिया। प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समय सीमा का पालन अनिवार्य है और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती।
कई जिलों में इस बार तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी। गेट पर एडमिट कार्ड और पहचान पत्र की जांच, उसके बाद मेटल डिटेक्टर से स्कैनिंग और अंत में परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पहले अंतिम सत्यापन किया गया। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्ट वॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहे। कई केंद्रों पर छात्रों से जूते-मोजे तक उतरवाकर जांच की गई, जिससे कुछ जगहों पर असंतोष भी देखने को मिला।
दरभंगा और मुजफ्फरपुर में महिला परीक्षार्थियों की जांच को लेकर चर्चा तेज रही। पहचान सत्यापन के दौरान कुछ छात्राओं से चेहरा दिखाने के लिए बुर्का हटाने को कहा गया। प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह महिला कर्मियों की निगरानी में और बंद कमरे में की गई, ताकि किसी की गरिमा प्रभावित न हो। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं और पहचान सुनिश्चित करना परीक्षा प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। इसके बावजूद कुछ अभिभावकों ने इसे लेकर आपत्ति जताई और केंद्र के बाहर नाराजगी व्यक्त की।
राज्य के कई संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारी तैनात किए गए थे। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई और कई जगहों पर लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जा रही थी। उड़नदस्ता दल लगातार केंद्रों का निरीक्षण कर रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों में सामने आए नकल और अव्यवस्था के मामलों को देखते हुए इस बार सख्ती बढ़ाई गई है।
इसी बीच युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी द्वारा CBSE 10वीं परीक्षा छोड़ने की खबर ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि उनका क्रिकेट शेड्यूल और बोर्ड परीक्षा की तिथियां टकरा रही थीं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि उभरते खिलाड़ियों को लचीली शैक्षणिक व्यवस्था मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने खेल करियर पर ध्यान दे सकें। वहीं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोगों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है और इसे नजरअंदाज करना दीर्घकालीन रूप से सही नहीं माना जा सकता।
इस घटनाक्रम के बीच शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और नकलमुक्त बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिला प्रशासन ने अभिभावकों से सहयोग की अपील की है और कहा है कि परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में अनावश्यक भीड़ न लगाएं।
पहले दिन की परीक्षा अधिकांश केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन जिन जिलों में अव्यवस्था की खबरें आईं, वहां प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। आगामी पालियों में और कड़े इंतजाम किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा अवधि के दौरान सुरक्षा, पारदर्शिता और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मैट्रिक परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है, इसलिए हर छोटी-बड़ी घटना पर नजर रखी जा रही है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि शेष परीक्षाएं बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों। LIVE अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।








