अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बीच विश्वविद्यालय कोर्ट में छात्रों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने कुलपति प्रो. नईमा खातून को पत्र लिखकर मांग की है कि छात्रसंघ चुनाव के साथ विश्वविद्यालय कोर्ट के 11 छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव भी कराए जाएं। उनका कहना है कि छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी केवल छात्रसंघ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था में भी उनकी निर्वाचित भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब्दुल हफीज गांधी ने अपने पत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आठ वर्ष के अंतराल के बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने का स्वागत किया है। उनके अनुसार, लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण छात्र प्रतिनिधित्व का मुद्दा लगातार उठता रहा है। अब जब विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की तैयारी शुरू हो चुकी है, तो इसी अवसर पर विश्वविद्यालय कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव को भी शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे चुनाव की पूरी प्रक्रिया के माध्यम से छात्रों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिल सकेगा।
गांधी ने पत्र में वर्ष 2018 के चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय छात्रसंघ और विश्वविद्यालय कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव एक ही चुनाव प्रक्रिया के तहत कराए गए थे। इसी आधार पर उन्होंने इस बार भी दोनों चुनाव साथ कराने का अनुरोध किया है। उनका मानना है कि जब विश्वविद्यालय में चुनाव संबंधी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तब कोर्ट के प्रतिनिधियों के चुनाव को भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे अलग-अलग समय पर चुनाव कराने की जरूरत और उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी विचार किया जा सकेगा।
उन्होंने कुलपति से यह भी अनुरोध किया है कि यदि कोर्ट के 11 छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के लिए अलग अधिसूचना जारी करना आवश्यक हो, तो उसे जल्द जारी किया जाए। इससे छात्रों को चुनाव की व्यवस्था, पात्रता और प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। गांधी ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार पात्र विद्यार्थियों को प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलना चाहिए और चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह की अस्पष्टता नहीं रहनी चाहिए।
विश्वविद्यालय कोर्ट एएमयू की महत्वपूर्ण वैधानिक संस्था है। ऐसे में इसमें छात्रों के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर यह मांग उठाई गई है। छात्र प्रतिनिधि विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों को संबंधित मंच तक पहुंचाने और छात्र समुदाय के विचार सामने रखने में भूमिका निभा सकते हैं। इसीलिए अब्दुल हफीज गांधी चाहते हैं कि छात्रसंघ चुनाव के साथ कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों का चुनाव भी कराया जाए, ताकि विश्वविद्यालय के भीतर छात्र प्रतिनिधित्व के दोनों पहलुओं पर एक साथ निर्णय हो सके।
इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि एएमयू में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए थे। चुनाव की मांग को लेकर परिसर में विद्यार्थियों के बीच आंदोलन और चर्चा का माहौल बना रहा। अब चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद छात्रसंघ की बहाली की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में कोर्ट के 11 छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव की मांग ने चुनाव व्यवस्था से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न को सामने ला दिया है।
अब्दुल हफीज गांधी की मांग के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कोर्ट के छात्र प्रतिनिधियों के चुनाव को मौजूदा चुनाव कार्यक्रम में शामिल करने के संबंध में क्या निर्णय लेता है। फिलहाल, उनके पत्र में दोनों चुनाव साथ कराने का अनुरोध किया गया है। इसे विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्वीकार किए जाने या इस पर कोई आधिकारिक निर्णय होने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है।
छात्रसंघ चुनाव और विश्वविद्यालय कोर्ट के प्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर उठी यह मांग एएमयू में छात्र भागीदारी के दायरे से जुड़ी है। एक ओर छात्रसंघ विद्यार्थियों की समस्याओं और मांगों को सामने रखने का मंच होता है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय कोर्ट में छात्र प्रतिनिधियों की मौजूदगी संस्थागत स्तर पर छात्र समुदाय की आवाज पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। इसी वजह से गांधी ने दोनों चुनावों को एक साथ कराने की मांग रखी है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का अगला कदम महत्वपू












