यह कहानी तीन जिगरी दोस्तों-आर्यन, समीर और नित्या, के एक अनोखे सपने की है। गर्मियों की छुट्टियों में, वे सिर्फ़ अपनी 'कल्पना' और घर के पुराने कबाड़ से एक रॉकेट बनाते हैं। घर की छत से शुरू होकर चाँद तक जाने का उनका यह काल्पनिक सफ़र रोमांच, दोस्ती और बचपन की प्यारी मासूमियत से भरा है।
पात्र
- आर्यन: नटखट और निडर (लीडर)।
- समीर: होशियार और शांत (इंजीनियर)।
- नित्या: जिज्ञासु और साहसी (पायलट)।
एक बड़ा सपना
गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं। आर्यन, समीर और नित्या हमेशा की तरह आर्यन के घर की छत पर लेटे हुए रात के आसमान को देख रहे थे।
'क्या तुम्हें लगता है कि हम कभी चाँद पर जा पाएंगे?' नित्या ने एक चमकते तारे की ओर इशारा करते हुए पूछा। आर्यन तुरंत उठ कर बैठ गया और बोला, 'क्यों नहीं? हम अपना खुद का रॉकेट बना सकते हैं!' समीर ने चश्मा ठीक करते हुए कहा, 'लेकिन रॉकेट बनाने के लिए तो बहुत सारा विज्ञान और सामान चाहिए।' आर्यन हँसा, 'अरे, हमारे पास 'कल्पना' है और कबाड़ का ढेर। बस काफी है!'
'सुपर रॉकेट' का निर्माण
अगली सुबह तीनों मिशन पर लग गए। उन्होंने तय किया कि वे दुनिया का सबसे अनोखा रॉकेट बनाएंगे।
समीर ने पुराने फ्रिज का एक बड़ा गत्ते का डिब्बा ढूंढा, जो रॉकेट का मुख्य हिस्सा बना।
नित्या ने प्लास्टिक की पुरानी बोतलों को पेंट करके रॉकेट के पीछे 'बूस्टर' लगा दिए।
आर्यन ने घर की पुरानी छलनी और तार लेकर एक 'कंट्रोल पैनल' बनाया।
शाम तक उनका 'सुपर रॉकेट-1' तैयार था। उन्होंने साइकिल के हेलमेट पहने और अपने रॉकेट के अंदर बैठ गए।
उल्टी गिनती
तीनों डिब्बे के अंदर सिकुड़ कर बैठे थे। आर्यन चिल्लाया, 'कंट्रोल रूम, क्या हम तैयार हैं?' नित्या ने बटन (जो असल में एक बोतल का ढक्कन था) दबाते हुए कहा, 'इंजन स्टार्ट!' समीर ने गिनती शुरू की: '१०... ९... ८... ५... ३... १... और लॉन्च!'
तीनों ने मिलकर ज़ोर से डिब्बे को हिलाना शुरू कर दिया। 'धड़-धड़-धड़!' उन्हें लगा जैसे वे सच में ज़मीन से ऊपर उठ रहे हैं।
तारों के बीच
आर्यन ने अपनी आँखें बंद कीं और चिल्लाया, 'देखो, हम बादलों को पार कर रहे हैं!' नित्या बोली, 'अरे देखो! वह शनि ग्रह (Saturn) है, उसकी रिंग कितनी सुंदर है।' समीर ने कहा, 'यहाँ गुरुत्वाकर्षण (Gravity) कम है, मुझे हल्का महसूस हो रहा है।'
भले ही वे घर के आंगन में थे, लेकिन उनकी कल्पना में वे अंधेरे अंतरिक्ष में तैर रहे थे। उन्होंने चॉकलेट बार खाई, जिसे उन्होंने 'स्पेस फूड' का नाम दिया था।
चाँद पर लैंडिंग और एलियन का हमला?
तभी आर्यन ने चिल्लाकर कहा, 'तैयार हो जाओ! हम चाँद पर उतरने वाले हैं।' एक ज़ोरदार 'धप्प!' के साथ उन्होंने हिलना बंद कर दिया। वे धीरे से डिब्बे से बाहर निकले।
आर्यन ने एक डंडा ज़मीन में गाड़ा और कहा, 'हमने चाँद फतह कर लिया!' अचानक, उन्हें एक भारी आवाज़ सुनाई दी- 'बूम! बूम! बूम!' तीनों डर गए। 'क्या यह कोई एलियन है?' समीर ने कांपते हुए पूछा।
तभी आर्यन की मम्मी छत पर आईं और हँसते हुए बोलीं, 'अरे अंतरिक्ष यात्रियों! नीचे आ जाओ, गरमा-गरम समोसे तैयार हैं!'
वापसी
तीनों दोस्त जोर से हँसे। उनका 'एलियन' तो असल में आर्यन की मम्मी थीं। समीर ने अपना हेलमेट उतारते हुए कहा, 'मिशन सफल रहा!' नित्या ने मुस्कुराते हुए कहा, 'हाँ, और सबसे अच्छी बात यह है कि चाँद पर समोसे भी मिलते हैं!'
उस रात, तीनों ने पेट भरकर समोसे खाए, यह जानते हुए कि असली जादू रॉकेट में नहीं, उनकी दोस्ती और कल्पना में था।
इस कहानी से सीख
'संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन हमारी कल्पना की कोई सीमा नहीं होती।'











