SpaceX ने अंतरिक्ष में बढ़ते टकराव के खतरे को देखते हुए Starlink सैटेलाइट्स की ऊंचाई कम करने का फैसला किया है। कंपनी सैटेलाइट्स को 550 किलोमीटर से घटाकर करीब 480 किलोमीटर की कक्षा में शिफ्ट करेगी, ताकि स्पेस डेब्रिस का जोखिम कम हो और सुरक्षा बेहतर बनी रहे।
Starlink Satellite Altitude Change: Elon Musk की कंपनी SpaceX ने अंतरिक्ष सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कंपनी अपने Starlink सैटेलाइट्स की कक्षा को पृथ्वी की निचली कक्षा में नीचे लाने जा रही है। यह बदलाव 2026 के दौरान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और इसका मकसद अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़, संभावित टकराव और मलबे के खतरे को कम करना है। हाल की तकनीकी खराबी की घटनाओं के बाद यह कदम और भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य की स्पेस मिशनों की सुरक्षा बेहतर हो सकेगी।
Starlink सैटेलाइट्स की ऊंचाई क्यों घटा रही है SpaceX
SpaceX के मुताबिक, फिलहाल Starlink के कई सैटेलाइट करीब 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम कर रहे हैं। कंपनी इन्हें चरणबद्ध तरीके से नीचे लाकर लगभग 480 किलोमीटर की कक्षा में शिफ्ट करेगी।
Starlink इंजीनियरिंग टीम का मानना है कि कम ऊंचाई पर कक्षा अपेक्षाकृत सुरक्षित होती है और वहां सैटेलाइट्स के आपस में टकराने की संभावना कम रहती है।

तकनीकी खराबी ने बढ़ाई चिंता
यह फैसला दिसंबर में सामने आई एक घटना के बाद और अहम हो गया। उस दौरान Starlink के एक सैटेलाइट से संपर्क टूट गया था और अंतरिक्ष में मलबा बनने के संकेत मिले थे। बताया गया कि सैटेलाइट की ऊंचाई अचानक कम हो गई थी, जिससे अंदरूनी खराबी या संभावित विस्फोट की आशंका जताई गई। इस घटना ने अंतरिक्ष मलबे के खतरे पर फिर से ध्यान खींचा।
कम कक्षा में क्यों माना जा रहा है ज्यादा सुरक्षित विकल्प
SpaceX के अनुसार, 500 किलोमीटर से नीचे की कक्षा में सैटेलाइट्स और मलबे की संख्या कम है। अगर किसी सैटेलाइट में खराबी आती है, तो वह जल्दी वायुमंडल में प्रवेश कर जल सकता है। इससे लंबे समय तक खतरनाक मलबा बने रहने का जोखिम घटता है, जो भविष्य की स्पेस मिशनों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ बनी बड़ी चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में पृथ्वी की निचली कक्षा में हजारों नए सैटेलाइट लॉन्च किए गए हैं। इंटरनेट और संचार सेवाओं की मांग ने इस रफ्तार को और तेज कर दिया है। Starlink के जरिए SpaceX इस समय दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट ऑपरेटर बन चुका है, जिसके करीब 10,000 सैटेलाइट सक्रिय बताए जाते हैं।












