आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 के सातवें दिन मां धूमावती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा और मंत्र जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने तथा साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है।
Ashadh Gupt Navratri 2026: सातवें दिन मां धूमावती की आराधना की जाती है। दशमहाविद्याओं में शामिल मां धूमावती की पूजा विशेष रूप से तांत्रिक साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। श्रद्धालु इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा कर देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
मां धूमावती की पूजा का धार्मिक महत्व
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन मां धूमावती को समर्पित होता है। सनातन धर्म में मां धूमावती को दस महाविद्याओं में सातवां स्वरूप माना गया है। अन्य देवी स्वरूपों की तुलना में मां धूमावती का स्वरूप अलग और गंभीर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वे जीवन के दुख, संकट, भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान उनकी पूजा विशेष रूप से साधकों और तंत्र साधना करने वालों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन सामान्य श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा और सात्विक भाव से उनकी आराधना कर सकते हैं।
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ऐसी मान्यता है कि मां धूमावती की कृपा से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता प्राप्त होती है। यही कारण है कि गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
सातवें दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके वहां मां धूमावती का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर धूप, पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान देवी का ध्यान करते हुए धूमावती मंत्र, दुर्गा सप्तशती या धूमावती स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रातःकाल का समय, ब्रह्म मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। हालांकि, पूजा से पहले अपने शहर के पंचांग या योग्य विद्वान से शुभ मुहूर्त की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए।
पूजा के समय किन बातों का रखें ध्यान
मां धूमावती की पूजा पूरी श्रद्धा, संयम और शुद्ध मन से करनी चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करने और क्रोध, अहंकार तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। पूजा के दौरान दिखावे की बजाय सच्ची श्रद्धा और नियमों का पालन अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
यदि कोई साधक विशेष तांत्रिक साधना करना चाहता है, तो उसे योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। बिना उचित ज्ञान के ऐसी साधनाओं से बचना चाहिए। सामान्य श्रद्धालु केवल विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और देवी का स्मरण करके भी उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
मां धूमावती की पूजा से क्या मिलते हैं लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां धूमावती की उपासना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घटता है। कई श्रद्धालु इस दिन विशेष रूप से परिवार की सुख-शांति, मानसिक मजबूती और संकटों से रक्षा की कामना करते हैं। यह भी माना जाता है कि मां धूमावती अपने भक्तों को धैर्य, विवेक और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं।
गुप्त नवरात्रि आत्मचिंतन, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व माना जाता है। इसलिए इस दिन पूजा के साथ दान-पुण्य, जरूरतमंदों की सहायता और सकारात्मक सोच अपनाना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे पूरे विधि-विधान और आस्था के साथ मां धूमावती की आराधना करें तथा पूजा के समय स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ मुहूर्त का पालन करें। इससे धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति तथा आत्मबल का संचार होता है।








