समाज सुधारक ज्योतिबा राव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर राजस्थान की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की मौजूदा भजनलाल शर्मा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए तीखी आलोचना की है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है।
Ashok Gehlot: जयपुर में समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद करने का आरोप लगाया। गहलोत ने इसे समाज कल्याण और समानता की भावना के खिलाफ कदम बताया और इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग भी की।
फुले जयंती पर राजनीतिक बयानबाजी तेज
ज्योतिबा फुले जयंती के कार्यक्रम में बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि महात्मा फुले ने अपना पूरा जीवन समाज से भेदभाव और असमानता को खत्म करने के लिए समर्पित किया था। लेकिन आज की नीतियां उस विचारधारा के विपरीत दिशा में जा रही हैं। उन्होंने कहा कि फुले के विचारों को केवल मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से लागू किया जाना चाहिए।
जनकल्याणकारी योजनाओं पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार के दौरान शुरू की गई कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं को वर्तमान सरकार ने बंद या कमजोर कर दिया है। गहलोत के अनुसार, ये योजनाएं गरीब, किसान, महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए बेहद जरूरी थीं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के बंद होने से सीधे तौर पर आम जनता प्रभावित हो रही है और यह फैसला जनहित के खिलाफ है। गहलोत ने यह भी दावा किया कि इन योजनाओं की सराहना पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं।
अशोक गहलोत ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पहले कई योजनाओं की सराहना की थी और यह भी आश्वासन दिया था कि सरकार बदलने के बाद भी इन योजनाओं को जारी रखा जाएगा। ऐसे में अब उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करें और यह सुनिश्चित करें कि जनता के हित की योजनाएं बंद न हों।
सामाजिक समानता बनाम नीतिगत बदलाव का मुद्दा
गहलोत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां समाज में अमीर और गरीब के बीच की खाई को और गहरा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति महात्मा फुले के विचारों के बिल्कुल विपरीत है, जिन्होंने हमेशा समानता और सामाजिक न्याय की बात की थी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जो समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलें, न कि विभाजन को बढ़ावा दें।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से अपील की कि जो जनकल्याणकारी योजनाएं बंद की गई हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का सीधा लाभ आम लोगों को मिलता था और इन्हें बंद करने से सबसे ज्यादा नुकसान कमजोर वर्गों को हुआ है।











