मध्यप्रदेश को औद्योगिक हब बनाने की दिशा में केंद्र ने ₹48,000 करोड़ की रेल परियोजनाओं की घोषणा की। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई ट्रेनों, लाइन विस्तार और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से कनेक्टिविटी मजबूत होने का दावा किया।
MP News: मध्यप्रदेश को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रेल मंत्री Ashwini Vaishnav ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल से गुजरात तक प्रस्तावित नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राज्य के औद्योगिक विकास के लिए मजबूत आधार साबित होगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में रेल मंत्री ने मध्यप्रदेश को दो नई ट्रेनों की सौगात भी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Mohan Yadav भोपाल रेलवे स्टेशन से कार्यक्रम में शामिल हुए। राज्य के उपमुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के तीसरे कार्यकाल में मध्यप्रदेश में रेलवे से जुड़ी अभूतपूर्व परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लागत लगभग 48,000 करोड़ रुपये है।
दो नई ट्रेनों से बढ़ेगा सीधा रेल संपर्क
कार्यक्रम के दौरान दो नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई। इनमें भोपाल–धनबाद–भोपाल त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस और भोपाल–चोपन–भोपाल साप्ताहिक एक्सप्रेस शामिल हैं।
इन ट्रेनों की शुरुआत से मध्यप्रदेश का उत्तर प्रदेश और झारखंड से सीधा रेल संपर्क मजबूत होगा। रेल मंत्रालय के अनुसार यात्रियों की बढ़ती मांग और बेहतर कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
नई ट्रेनों से सिंगरौली, धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले व्यापारियों, कर्मचारियों और छात्रों को विशेष लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इसे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपहार बताया और कहा कि यह सेवा केवल यात्रा सुविधा नहीं बल्कि विकास का माध्यम है।
इंदौर–मनमाड रेल लाइन को मिली मंजूरी
रेल मंत्री ने बताया कि लंबे समय से प्रतीक्षित इंदौर–मनमाड नई रेलवे लाइन को 18,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मंजूरी दी गई है। इसे क्षेत्र का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश को महाराष्ट्र से बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जिससे औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
तीसरी और चौथी लाइन परियोजनाओं पर जोर
रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए कई प्रमुख सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
भुसावल–खंडवा परियोजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। प्रयागराज–मानिकपुर तीसरी लाइन के लिए 1,640 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। रतलाम–नागदा सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन के लिए 1,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा इटारसी–नागपुर चौथी लाइन के लिए 5,400 करोड़ रुपये और इटारसी–भोपाल–बीना चौथी लाइन कॉरिडोर के लिए 4,300 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। वडोदरा–रतलाम तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को 8,800 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गोंदिया–जबलपुर दोहरीकरण परियोजना को भी 5,200 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, माल और यात्री ट्रैफिक का दबाव कम करना और समयबद्ध परिवहन सुनिश्चित करना है।
नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देगा औद्योगिक रफ्तार
केंद्रीय बजट में दानकुनी से सूरत तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है। यह कॉरिडोर ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा।
2,052 किलोमीटर लंबा यह पूर्व–पश्चिम फ्रेट कॉरिडोर मौजूदा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा। इससे पश्चिमी बंदरगाहों तक माल की निर्बाध आवाजाही संभव होगी और मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा। रेल मंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश के बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास के लिए मजबूत नींव का काम करेगा।
बंदरगाहों से बेहतर कनेक्टिविटी
नया फ्रेट कॉरिडोर मध्यप्रदेश को गुजरात और महाराष्ट्र के प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ेगा। महाराष्ट्र में बन रहा वधावन बंदरगाह, साथ ही हजीरा और मुंद्रा जैसे मौजूदा पोर्ट से राज्य का संपर्क बेहतर होगा।
हाई-स्पीड फ्रेट कनेक्टिविटी के माध्यम से उद्योगों को निर्यात और आयात दोनों में सुविधा मिलेगी। चाहे कंटेनरीकृत कार्गो हो या थोक माल, परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी। बेहतर लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम से राज्य में निवेश आकर्षित होगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश बनेगा औद्योगिक हब
रेल परियोजनाओं और फ्रेट कॉरिडोर के विस्तार से मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल करने की दिशा में मजबूत कदम उठाया गया है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज माल ढुलाई और आधुनिक रेल इंफ्रास्ट्रक्चर से राज्य में मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और एग्री-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि मजबूत रेल नेटवर्क से उद्योगों की लागत कम होगी, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विकास की नई पटरी पर मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई रेल सेवाएं और परियोजनाएं केवल परिवहन सुविधा नहीं बल्कि भविष्य की प्रगति का मार्ग हैं। इससे राज्य के विभिन्न हिस्सों को आपस में और देश के अन्य राज्यों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। रेल मंत्रालय की इन पहलों से मध्यप्रदेश को औद्योगिक, व्यापारिक और सामाजिक रूप से नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।












