IDFC First Bank: 590 करोड़ फ्रॉड केस में एंटी-करप्शन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, 4 अधिकारी सस्पेंड

IDFC First Bank में 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में हरियाणा विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज की। बैंक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार।

IDFC First Bank के 590 करोड़ रुपये फ्रॉड मामले में हरियाणा विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की। भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराएं लगाई गईं। चार अधिकारी निलंबित हैं। बैंक ने आरबीआई को सूचित कर जांच में सहयोग का भरोसा दिया।

Haryana: IDFC First Bank में 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। हरियाणा सरकार के ग्रुप ऑफ अकाउंट्स से जुड़े इस फ्रॉड मामले में अब एंटी करप्शन एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।

बैंक ने पहले ही इस पूरे मामले की जानकारी बैंकिंग रेगुलेटर आरबीआई को दे दी थी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। अब एसीबी द्वारा औपचारिक एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद जांच और तेज हो गई है।

किन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने बैंक अधिकारियों, पब्लिक सर्वेंट्स और इस मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 13(2) और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इनमें सेक्शन 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) शामिल हैं।

इन धाराओं के तहत कदाचार, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधों की जांच की जाएगी। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घोटाले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।

कैसे सामने आया 590 करोड़ का फ्रॉड

रविवार को बैंक ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग के जरिए खुलासा किया था कि उसके कुछ कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों ने मिलकर हरियाणा सरकार के ग्रुप ऑफ अकाउंट्स में 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है।

दरअसल हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर उसमें जमा राशि को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। इस प्रक्रिया के दौरान खाते की वास्तविक शेष राशि और विभाग द्वारा बताई गई राशि में अंतर पाया गया। इसी अंतर ने पूरे मामले को उजागर किया।

इसके बाद 18 फरवरी 2026 से अन्य हरियाणा सरकारी संस्थानों ने भी अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया। जांच में पाया गया कि उनके द्वारा बताए गए बैलेंस और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस में भी अंतर है।

मामला किन खातों तक सीमित

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गड़बड़ी केवल हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ विशेष खातों तक सीमित है। ये खाते चंडीगढ़ शाखा के माध्यम से संचालित हो रहे थे। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह मामला शाखा के अन्य ग्राहकों से संबंधित नहीं है।

4 अधिकारियों को किया गया निलंबित

जांच पूरी होने तक बैंक ने चार संदिग्ध अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कदम आंतरिक अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

बैंक ने कहा है कि यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगा।

आरबीआई को दी गई जानकारी

बैंक ने इस मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक को भी दे दी है। चूंकि यह मामला सरकारी खातों और बड़ी राशि से जुड़ा है, इसलिए रेगुलेटरी निगरानी भी बढ़ गई है।

आरबीआई ऐसे मामलों में बैंक की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली, ऑडिट प्रक्रिया और जोखिम प्रबंधन व्यवस्था की भी समीक्षा करता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

जांच की दिशा और संभावित कार्रवाई

एंटी करप्शन ब्यूरो अब यह जांच करेगा कि क्या इस फ्रॉड में पब्लिक सर्वेंट्स की भी भूमिका रही है। यदि सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले में कई स्तरों पर जांच की आवश्यकता होगी। बैंकिंग ट्रांजैक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड, इंटरनल ईमेल और अकाउंट स्टेटमेंट की बारीकी से जांच की जाएगी।

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