NEET-PG कट-ऑफ में हाल ही में कमी को लेकर बहस तेज हुई है, लेकिन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि कम अंक का मतलब कमजोर डॉक्टर नहीं है। उम्मीदवार पहले से ही MBBS और इंटर्नशिप पूरी कर चुके योग्य हैं। कट-ऑफ घटाने का उद्देश्य खाली पोस्टग्रेजुएट सीटें भरना और अधिक छात्रों को अवसर देना है।
NEET-PG Cut-Off Controversy: देशभर में NEET-PG की कट-ऑफ में कमी को लेकर बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि यह बदलाव उम्मीदवारों की डॉक्टर के रूप में योग्यता को प्रभावित नहीं करता। भारत में मेडिकल छात्रों के लिए यह कदम खाली पोस्टग्रेजुएट सीटों को भरने और अधिक योग्य छात्रों को अवसर देने के उद्देश्य से किया गया है। इस बार जनरल और EWS उम्मीदवारों के लिए कट-ऑफ 103, जनरल PWD के लिए 90 और SC/ST/OBC के लिए -40 अंक तय किए गए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि NEET-PG केवल मेरिट लिस्ट तैयार करने की परीक्षा है, जबकि MBBS और इंटर्नशिप पूरी करने वाले सभी उम्मीदवार पहले से ही योग्य डॉक्टर हैं।
नए कट-ऑफ अंक और उनका महत्व
इस बार NEET-PG का कट-ऑफ जनरल और EWS उम्मीदवारों के लिए 103 अंक, जनरल PWD के लिए 90 और SC/ST/OBC उम्मीदवारों के लिए -40 अंक निर्धारित किया गया है। इस कमी के बाद अधिक छात्र काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीट पाने का मौका बढ़ जाएगा।
सरकार का कहना है कि कट-ऑफ कम करने का मुख्य उद्देश्य खाली रहने वाली पोस्टग्रेजुएट सीटों को भरना है। सालाना लगभग 70,000 उपलब्ध सीटों में से कई खाली रह जाती थीं, जबकि परीक्षा में दो लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल होते हैं। यह कदम देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए उठाया गया है।

NEET-PG कम अंक का मतलब कमजोर डॉक्टर नहीं
केंद्र सरकार ने जोर दिया है कि NEET-PG परीक्षा से पहले ही उम्मीदवार न्यूनतम योग्यता पूरी कर चुके होते हैं। MBBS पास करने के लिए थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में कम से कम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं, साथ ही एक वर्ष की इंटर्नशिप भी पूरी करनी होती है। इस तरह, NEET-PG केवल प्रवेश परीक्षा है, जो सीट अलॉटमेंट के लिए मेरिट तय करती है।
सरकार का यह स्पष्टिकरण मेडिकल छात्रों, अभिभावकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए दिया गया। कम अंक वाले उम्मीदवार भी योग्य डॉक्टर हैं और उनकी भविष्य की विशेषज्ञता पर इस कट-ऑफ बदलाव का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।










