असम के कछार जिले में पुलिस ने नाका चेकिंग के दौरान 60,000 याबा टैबलेट जब्त किए, जिनकी कीमत करीब 18 करोड़ रुपये बताई गई है। इस कार्रवाई को ड्रग तस्करी नेटवर्क पर बड़ी सफलता माना जा रहा है और जांच जारी है।
गुवाहाटी: असम में नशा तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। कछार (Cachar) जिले में नियमित नाका चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन से 60,000 याबा टैबलेट बरामद किए हैं। इनकी अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग ₹18 करोड़ बताई जा रही है। इस कार्रवाई को राज्य में सक्रिय संगठित ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम की तत्परता और सतर्कता की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि असम पुलिस नशा माफिया के हर नए तरीके का जवाब और अधिक सख्ती से दे रही है।
कछार में नाका चेकिंग के दौरान बड़ी बरामदगी
कछार जिले में पुलिस द्वारा नियमित नाका चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान एक वाहन को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रोका गया। तलाशी लेने पर उसमें छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में याबा टैबलेट्स बरामद हुईं।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह खेप एक संगठित तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है, जो इस क्षेत्र में सक्रिय है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह माल कहां से लाया गया था और इसे कहां पहुंचाया जाना था।
60,000 याबा टैबलेट्स की कीमत ₹18 करोड़ आंकी गई
पुलिस के अनुसार, जब्त की गई 60,000 याबा टैबलेट्स की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत लगभग ₹18 करोड़ तक हो सकती है। याबा टैबलेट्स को बेहद खतरनाक सिंथेटिक ड्रग माना जाता है, जिसकी तस्करी कई देशों में गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
इस बड़ी बरामदगी से तस्करी नेटवर्क को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रणनीतिक झटका भी लगा है, क्योंकि इतनी बड़ी खेप का पकड़ा जाना उनके सप्लाई चेन को बाधित करता है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस सफलता को राज्य सरकार की एंटी-ड्रग नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य असम को नशा मुक्त बनाना है और इसके लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि नशा माफिया नए-नए तरीकों से तस्करी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन असम पुलिस भी उतनी ही तेजी और सतर्कता से जवाब दे रही है। उन्होंने पुलिस की भूमिका को इस अभियान में बेहद महत्वपूर्ण बताया।

संगठित ड्रग नेटवर्क पर पुलिस की नजर
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक छोटी कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे सप्लाई चेन को ट्रेस करने में जुटी हैं।
इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि ड्रग्स की सप्लाई कहां से शुरू हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसे किन राज्यों या देशों में भेजा जाना था। पुलिस को संदेह है कि यह नेटवर्क अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हो सकता है।
याबा टैबलेट्स और उनका खतरा
याबा टैबलेट्स एक प्रकार की सिंथेटिक ड्रग होती हैं, जिनमें मेथामफेटामिन और कैफीन जैसे हानिकारक रसायन होते हैं। इन्हें अवैध रूप से तैयार किया जाता है और यह नशे की गंभीर लत पैदा करती हैं।
इनका सेवन व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। यह ड्रग्स न केवल लत लगाती हैं बल्कि व्यवहार में आक्रामकता, मानसिक असंतुलन और हृदय संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं।
इसी वजह से दुनिया के कई देशों में इनकी तस्करी और उपयोग पर सख्त प्रतिबंध है।
असम में नशे के खिलाफ अभियान तेज
पिछले कुछ वर्षों में असम सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ अपना अभियान काफी तेज किया है। राज्य में लगातार नाका चेकिंग, छापेमारी और तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है।
सरकार का लक्ष्य “ड्रग-फ्री असम” बनाना है, जिसके लिए पुलिस और प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं। इस अभियान के तहत कई बड़े ड्रग रैकेट का खुलासा भी किया गया है।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी निगरानी
कछार जैसे सीमावर्ती जिलों में ड्रग तस्करी की संभावना अधिक रहती है क्योंकि ये क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय मार्गों के करीब हैं। इसी कारण पुलिस ने इन इलाकों में निगरानी और सख्त कर दी है।
स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस मिलकर लगातार संयुक्त अभियान चला रही है ताकि तस्करी के हर प्रयास को रोका जा सके।
आगे की जांच और संभावित गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है और कई अहम सुरागों पर काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जब्त किए गए वाहन, मोबाइल डेटा और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश की जा रही है।









