असम CM हिमंत बिस्व सरमा ने टाली अपनी किताब की लॉन्चिंग, बोले- आज का दिन भूपेन दा के नाम

असम CM हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी PhD थीसिस पर आधारित किताब का विमोचन टाल दिया। गौहाटी विश्वविद्यालय में भूपेन हजारिका पर पुस्तक लॉन्च होने के कारण लिया फैसला।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी PhD थीसिस पर आधारित किताब का निर्धारित विमोचन टाल दिया। गौहाटी विश्वविद्यालय में उसी कार्यक्रम में भूपेन हजारिका के जीवन और विरासत पर पुस्तक भी लॉन्च होनी थी। सरमा ने इसे सम्मान का विषय बताया।

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी डॉक्टरेट थीसिस पर आधारित किताब के विमोचन को टालने का फैसला किया है। किताब का विमोचन गौहाटी विश्वविद्यालय में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा किया जाना था। सरमा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कार्यक्रम स्थगित करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली कि उसी कार्यक्रम में महान असमिया गायक भूपेन हजारिका के जीवन और विरासत पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन निर्धारित था। इसके बाद उन्होंने अपनी किताब के लॉन्च को टालने का फैसला किया।

सरमा ने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि उनकी किताब का विमोचन भूपेन हजारिका को समर्पित पुस्तक के साथ एक ही अवसर पर हो। उन्होंने इस फैसले के जरिए असम के महान सांस्कृतिक व्यक्तित्व के प्रति सम्मान का संदेश दिया।

अपनी PhD थीसिस पर आधारित है किताब

हिमंत बिस्व सरमा की प्रस्तावित किताब का नाम Integrated Development – The Role of the North Eastern Region है। यह पुस्तक उनकी डॉक्टरेट थीसिस पर आधारित है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनकी किताब का विमोचन सोमवार को गौहाटी विश्वविद्यालय में निर्धारित था। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के हाथों पुस्तक जारी की जानी थी।

किताब का विषय पूर्वोत्तर भारत के विकास और इस क्षेत्र की भूमिका से जुड़ा हुआ है। शीर्षक से स्पष्ट है कि इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के एकीकृत विकास से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किताब की सामग्री, शोध के प्रमुख निष्कर्षों या प्रकाशन की नई तारीख का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

भूपेन हजारिका पर भी होनी थी किताब लॉन्च

इसी कार्यक्रम में असम के दिग्गज गायक और सांस्कृतिक प्रतीक भूपेन हजारिका के जीवन और विरासत पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन प्रस्तावित था।

भूपेन हजारिका को असम के सबसे प्रभावशाली सांस्कृतिक व्यक्तित्वों में गिना जाता है। संगीत और कला के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें असम ही नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य में भी विशेष स्थान दिलाया।

इसी वजह से मुख्यमंत्री ने अपनी किताब की लॉन्चिंग को भूपेन हजारिका पर केंद्रित पुस्तक के विमोचन के साथ करने से बचने का फैसला किया।

सरमा ने कहा- आज का दिन भूपेन दा के नाम

हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी किताब के विमोचन को स्थगित करने के पीछे की वजह बताते हुए भूपेन हजारिका के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने संकेत दिया कि वह नहीं चाहते कि उनके व्यक्तिगत अकादमिक काम का कार्यक्रम उस पुस्तक के साथ एक ही मंच पर हो, जो असम के महान सांस्कृतिक व्यक्तित्व की जिंदगी और विरासत को समर्पित है।

मुख्यमंत्री के इस फैसले का केंद्रीय भाव यही था कि कार्यक्रम में भूपेन हजारिका की स्मृति और योगदान को प्राथमिकता मिले।

उनकी टिप्पणी का संदेश असम की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने अपनी किताब को लेकर होने वाले कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के बजाय इसे स्थगित करना उचित समझा।

उपराष्ट्रपति को करना था विमोचन

गौहाटी विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को मुख्यमंत्री की किताब का विमोचन करना था।

इस कार्यक्रम का महत्व इसलिए भी था क्योंकि पुस्तक सीधे मुख्यमंत्री के डॉक्टरेट शोध से जुड़ी हुई है। सरमा ने पूर्वोत्तर भारत के एकीकृत विकास और इस क्षेत्र की भूमिका पर अपनी PhD थीसिस तैयार की है, जिसका अब पुस्तक के रूप में प्रकाशन किया गया है।

हालांकि, मुख्यमंत्री के अनुरोध के बाद इस पुस्तक के निर्धारित विमोचन को टाल दिया गया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन से कार्यक्रम को स्थगित करने का अनुरोध मुख्यमंत्री की ओर से किया गया था। नई लॉन्च तारीख के बारे में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

भूपेन हजारिका की विरासत को प्राथमिकता

असम की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भूपेन हजारिका का नाम केवल संगीत तक सीमित नहीं है। वह राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं।

उनकी रचनाओं और संगीत ने असम की संस्कृति, समाज और मानवीय संवेदनाओं को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाई। ऐसे में उनके जीवन और विरासत पर आधारित पुस्तक का विमोचन असम के लिए सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर माना जा सकता है।

मुख्यमंत्री का निर्णय इसी सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए लिया गया कदम माना जा रहा है। उन्होंने अपनी किताब के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के बजाय भूपेन हजारिका पर केंद्रित आयोजन को अलग महत्व देने का विकल्प चुना।

राजनीति से अलग दिखा सांस्कृतिक संदेश

हिमंत बिस्व सरमा का यह फैसला राजनीतिक कार्यक्रमों से अलग एक सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अपनी अकादमिक उपलब्धि से जुड़ी पुस्तक के विमोचन को स्थगित करके राज्य के एक प्रमुख सांस्कृतिक प्रतीक को प्राथमिकता दी।

उनकी किताब पूर्वोत्तर के विकास जैसे नीतिगत और अकादमिक विषय पर केंद्रित है, जबकि दूसरी पुस्तक भूपेन हजारिका के जीवन और विरासत पर आधारित है। दोनों पुस्तकों के विषय अलग हैं, लेकिन उनका विमोचन एक ही कार्यक्रम में निर्धारित था।

सरमा ने इसी वजह से अपनी पुस्तक का लॉन्च टालने का फैसला किया।

पूर्वोत्तर के विकास पर केंद्रित शोध

सरमा की किताब Integrated Development – The Role of the North Eastern Region का केंद्रीय विषय पूर्वोत्तर भारत के विकास में क्षेत्र की भूमिका से संबंधित है।

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से बुनियादी ढांचे, संपर्क, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय एकीकरण जैसे मुद्दों के संदर्भ में राष्ट्रीय नीतियों में महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री की डॉक्टरेट थीसिस इसी व्यापक विषय पर आधारित है।

हालांकि, उपलब्ध सामग्री में शोध के विस्तृत निष्कर्ष, अध्यायों या विशिष्ट नीति सुझावों की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए पुस्तक की विषयवस्तु को लेकर इससे आगे कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

लॉन्च की नई तारीख का इंतजार

मुख्यमंत्री के अनुरोध के बाद पुस्तक के निर्धारित विमोचन को टाल दिया गया है। अब अगला सवाल इसकी नई लॉन्च तारीख को लेकर है।

उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि गौहाटी विश्वविद्यालय में सरमा की किताब का नया विमोचन कार्यक्रम कब आयोजित होगा। फिलहाल मुख्यमंत्री की ओर से साझा की गई जानकारी का मुख्य केंद्र यही है कि उन्होंने भूपेन हजारिका पर आधारित पुस्तक के साथ अपनी किताब का लॉन्च नहीं करने का फैसला किया।

इस घटनाक्रम में एक ओर मुख्यमंत्री की अकादमिक पुस्तक का विमोचन टला है, वहीं दूसरी ओर भूपेन हजारिका के जीवन और विरासत को समर्पित पुस्तक के कार्यक्रम को अलग महत्व मिला है।

असम की संस्कृति और अकादमिक शोध एक मंच पर

इस पूरे घटनाक्रम ने असम के अकादमिक और सांस्कृतिक जीवन के दो अलग पहलुओं को सामने ला दिया है। एक तरफ मुख्यमंत्री की डॉक्टरेट थीसिस पर आधारित पुस्तक है, जो पूर्वोत्तर के एकीकृत विकास की भूमिका पर केंद्रित है। दूसरी तरफ भूपेन हजारिका की विरासत पर केंद्रित पुस्तक है, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है।

हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी पुस्तक के विमोचन को स्थगित कर यह स्पष्ट किया कि वह दोनों पुस्तकों के विमोचन को एक ही अवसर पर नहीं करना चाहते। अब उनकी किताब के नए विमोचन कार्यक्रम की तारीख का इंतजार है।

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