PM मोदी पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को झटका, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मानहानि केस रद्द करने से किया इनकार

PM मोदी पर कथित टिप्पणी के मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने समन रद्द करने से इनकार किया और 6 हफ्ते की राहत दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने 2019 में जारी समन रद्द करने से इनकार किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए छह सप्ताह की राहत दी है।

मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित मानहानिकारक टिप्पणी से जुड़े मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा 2019 में जारी किए गए समन को रद्द करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, राहुल गांधी को तत्काल मजिस्ट्रेट अदालत में पेश होने से छह सप्ताह की राहत दी गई है।

न्यायमूर्ति एनआर बोरकर ने मंगलवार को राहुल गांधी की याचिका पर आदेश पारित किया। इस याचिका में उन्होंने समन जारी करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। हाई कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी के पास अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनौती देने का विकल्प है।

क्या है पूरा मामला

यह मानहानि का मामला बीजेपी नेता महेश श्रीश्रीमल की शिकायत पर आधारित है। शिकायतकर्ता ने मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष मामला दायर किया था।

शिकायत के मुताबिक, राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में आयोजित एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक बयान दिए थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन टिप्पणियों के बाद अलग-अलग समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मोदी को कथित तौर पर ट्रोल किया गया।

इसी शिकायत के आधार पर मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस समन और संबंधित आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने समन रद्द करने से किया इनकार

मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत के समन को रद्द करने की मांग की गई थी।

अदालत के इस फैसले का अर्थ है कि फिलहाल राहुल गांधी के खिलाफ चल रही मानहानि की कार्यवाही को इस स्तर पर समाप्त नहीं किया गया है। समन जारी करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को हाई कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।

हालांकि, अदालत ने राहुल गांधी को कुछ समय की राहत दी है, जिससे वह फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकें।

राहुल गांधी को मिली छह सप्ताह की राहत

हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करने के साथ राहुल गांधी को छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष उपस्थित होने से राहत दी है।

यह राहत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय मिल सकता है। यानी हाई कोर्ट के फैसले के बावजूद राहुल गांधी के पास कानूनी प्रक्रिया में आगे अपील करने का रास्ता खुला हुआ है।

अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस बात पर निर्भर करेगा कि राहुल गांधी हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं या नहीं।

बीजेपी नेता की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई

मानहानि मामले की शुरुआत बीजेपी नेता महेश श्रीश्रीमल की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि राजस्थान की रैली में राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी मानहानिकारक थी।

शिकायत में यह भी दावा किया गया था कि कथित टिप्पणियों के बाद विभिन्न मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाते हुए ट्रोलिंग हुई।

यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और आपराधिक मानहानि की कानूनी प्रक्रिया के बीच संबंध को लेकर भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, अंतिम रूप से यह तय करना अदालतों का विषय होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कानूनी तौर पर किस तरह आगे बढ़ते हैं।

राजनीतिक बयान और कानूनी विवाद

राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के दो प्रमुख चेहरे हैं। ऐसे में दोनों से संबंधित किसी भी कानूनी मामले का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है।

राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं। दूसरी ओर, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और बीजेपी के शीर्ष नेताओं में से एक हैं।

इस मामले में हाई कोर्ट का फैसला ऐसे समय आया है जब राजनीतिक दलों के नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर कानूनी शिकायतें और अदालती कार्यवाही लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बनती रही हैं।

हालांकि, किसी बयान को मानहानिकारक माना जाए या नहीं, यह संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है। मौजूदा मामले में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और राहुल गांधी की कानूनी चुनौती के बीच अदालत ने फिलहाल समन रद्द करने से इनकार किया है।

हल्द्वानी मामले में भी राहुल गांधी के खिलाफ FIR

राहुल गांधी से जुड़ा एक अन्य मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी में भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वहां उनके खिलाफ एक कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर FIR दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कथित शुद्धिकरण की घटना को जातिगत रंग देने और सामाजिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की।

इस मामले में SC-ST Act के तहत भी कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा BNS की धारा 196 और 299 के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, ये आरोप और FIR एक अलग मामला है और इसका बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े मानहानि मामले से कोई सीधा कानूनी संबंध नहीं है।

हल्द्वानी की घटना का क्या है संदर्भ

उपलब्ध विवरण के अनुसार, 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। रैली के दो दिन बाद वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण की रस्म किए जाने की घटना सामने आई थी।

कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि खरगे के दलित होने के कारण उनकी रैली के बाद यह रस्म की गई। इसी घटना को लेकर बाद में राजनीतिक विवाद बढ़ा और राहुल गांधी के खिलाफ भी मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।

इस मामले में लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अलग है और इसे बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रहे मानहानि मामले से अलग समझना जरूरी है।

अब आगे क्या होगा

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद राहुल गांधी के सामने अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है। अदालत ने उन्हें छह सप्ताह की राहत दी है, इसलिए इस अवधि में मामले की आगे की कानूनी दिशा महत्वपूर्ण होगी।

यदि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हैं, तो शीर्ष अदालत में इस मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है। वहीं, यदि हाई कोर्ट का आदेश चुनौती नहीं दिया जाता या आगे की राहत नहीं मिलती, तो मजिस्ट्रेट अदालत में कार्यवाही आगे बढ़ सकती है।

फिलहाल हाई कोर्ट ने राहुल गांधी की उस मांग को स्वीकार नहीं किया है, जिसमें 2019 में जारी समन को रद्द करने की अपील की गई थी।

फैसले का राजनीतिक असर भी महत्वपूर्ण

राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में हाई कोर्ट का फैसला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में रहने की संभावना है। विपक्षी नेता के खिलाफ प्रधानमंत्री से संबंधित टिप्पणी के मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रहना कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, अदालत का मौजूदा फैसला केवल राहुल गांधी की समन रद्द करने की याचिका से संबंधित है। इसे मामले में दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मानहानि के आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।

इस समय सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने समन रद्द करने से इनकार किया है, लेकिन राहुल गांधी को छह सप्ताह की राहत दी है। अब नजर इस बात पर है कि वह इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हैं या नहीं।

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